आगर मालवा में शुक्रवार को दिगम्बर जैन समाज के प्रतिष्ठित संत मुनि श्री 108 विश्वसिद्ध सागर महाराज का देवलोक गमन हो गया। उन्होंने इंदौर-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित त्रिमूर्ति मंदिर में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे नगर और जैन समाज में शोक की लहर छा गई। मुनि विवर्द्धन सागर महाराज के शिष्य, मुनि विश्वसिद्ध सागर महाराज को उनके संयम, वैराग्य और सरल स्वभाव के लिए जाना जाता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन धर्म की साधना और आत्मकल्याण के लिए समर्पित कर दिया था। अंतिम डोल यात्रा और विदाई दोपहर में त्रिमूर्ति मंदिर से मुनि श्री की अंतिम डोल यात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों के साथ निकली इस यात्रा में न केवल जैन समाज, बल्कि अन्य समाजों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। विधि-विधान से अंतिम संस्कार नगर भ्रमण के बाद त्रिमूर्ति मंदिर परिसर में ही दिगम्बर जैन परंपरा के अनुसार मुनि श्री का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। गमगीन माहौल में समाज के लोगों ने अपने प्रिय संत को अंतिम विदाई दी और उनके बताए त्याग और संयम के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।


