आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम और युवजन श्रमिका रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) चीफ वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने तिरुपति मंदिर के लड्डू मिलावट मामले में बयान दिया है। उन्होंने शुक्रवार को दावा किया कि सीबीआई की SIT ने इस मामले में तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पूर्व चेयरमैन वाई.वी. सुब्बा रेड्डी और भूमना करुणाकर रेड्डी को क्लीन चिट दी है। उन्होंने कहा कि SIT ने साफ तौर पर कहा है कि TTD को सप्लाई किए घी में किसी भी प्रकार की पशु चर्बी की मिलावट नहीं पाई गई है। दरअसल, 2022 में लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी में मिलावट की कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद CBI ने जांच की। TTD ने उत्तराखंड की भोलेबाबा डेयरी को ब्लैकलिस्ट किया। इसके बावजूद डेयरी मालिकों ने दूसरी डेयरी फर्मों के नाम पर टेंडर हासिल किए और घी की सप्लाई जारी रखी। इनमें वैष्णवी डेयरी (तिरुपति), माल गंगा डेयरी (उत्तर प्रदेश) और AR डेयरी फूड्स (तमिलनाडु) शामिल हैं। ये सब सुब्बा रेड्डी के चेयरमैन रहते हुए हुआ था। 31 जनवरी: क्लीन चिट से SIT का इनकार तिरुपति मंदिर के लड्डू में मिलावट के मामले में मंदिर के बोर्ड TTD ने कहा था कि उसने किसी को भी क्लीनचिट नहीं दी है। बोर्ड के मौजूदा चेयरमैन बीआर नायडू ने कहा कि SIT की चार्जशीट में श्रीवारी लड्डू बनाने में मिलावटी घी की मौजूदगी साफ तौर पर साबित हुई है। कुछ ग्रुप गलत दावा करके भक्तों को गुमराह कर रहे हैं। CBI की फाइनल चार्जशीट में कहा गया है कि लड्डुओं में पशु चर्बी नहीं, मिलावटी घी का इस्तेमाल हुआ था। नेल्लोर कोर्ट में पेश चार्जशीट में कहा गया कि प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी में वनस्पति तेल, बीटा केरोटिन व एस्टर केमिकल की मिलावट पाई गई। उत्तराखंड के भगवानपुर की भोले बाबा डेयरी ने मिलावटी घी की सप्लाई की थी। YSRCP के वरिष्ठ नेता और पूर्व TTD चेयरमैन भूमना करुणाकर रेड्डी ने कहा था कि CBI रिपोर्ट में तिरुपति लड्डू में कोई पशु चर्बी नहीं पाई गई। रिपोर्ट ने NDA गठबंधन नेताओं के झूठे प्रचार और राजनीतिक नाटक का पर्दाफाश किया है। नायडू बोले- कंपनी के पास क्षमता नहीं थी फिर भी टेंडर दिया TTD चेयरमैन बीआर नायडू ने कहा था कि घी के टेंडर उन कंपनियों को दिए गए जिनके पास जरूरी क्षमता नहीं थी। लगभग 60 लाख किलोग्राम मिलावटी घी खरीदा गया, जिसकी कीमत लगभग ₹250 करोड़ थी। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) द्वारा किए गए टेस्ट में घी में जानवरों की चर्बी की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। कुछ संस्थाओं ने एक भी गाय न होने या कोई वास्तविक उत्पादन क्षमता न होने के बावजूद घी बनाने का दावा किया। इस कथित मिलावटी घी का इस्तेमाल करके लगभग 200 मिलियन लड्डू बनाए गए, जिससे तिरुमाला मंदिर की पवित्रता को गंभीर नुकसान पहुंचा। कुछ डेयरियों को सिर्फ कमीशन के लिए चुना गया और कुछ व्यक्तियों पर जानबूझकर हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिश की गई। 30 जनवरी: बोर्ड के पूर्व चेयरमैन ने हवन किया YSRCP नेता और पूर्व TTD चेयरमैन भूमना करुणाकर रेड्डी ने तिरुपति में श्रीनिवास प्रसादा निंदा परिहार होमम (श्रीनिवास प्रसाद निंदा निवारण अनुष्ठान) किया था। रेड्डी ने यह हवन प्रायश्चित के रूप में किया। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण की टिप्पणयों को पवित्र भगवान वेंकटेश्वर स्वामी लड्डू प्रसादम के खिलाफ बताया था। उन्होंने कहा था कि तिरुपति लड्डू मुद्दे पर CBI रिपोर्ट में तथ्यों को स्पष्ट रूप से स्थापित करने के बावजूद सरकार ने आधारहीन टिप्पणियां कीं। रेड्डी ने कहा कि लड्डू में मिलावट पर CBI रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कुछ अधिकारियों और घी सप्लायरों के बीच सांठगांठ थी, और इस मामले में किसी भी YSRCP नेता का कोई उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू कैबिनेट बैठकों में आरोप लगाते रहे, झूठा दावा करते हुए कि टेंडर नियमों में ढील के कारण मिलावट हुई। भूमना ने कहा था कि चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण दोनों ने सार्वजनिक रूप से मिलावट के बारे में चिंता जताई थी, लेकिन CBI रिपोर्ट ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की कि तिरुपति लड्डू में कोई पशु चर्बी नहीं पाई गई। CBI रिपोर्ट उनके गुमराह करने वाले अभियान का सीधा जवाब थी। TDP ने YSRCP पर आरोप लगाया था आंध्र के CM चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP ने 18 सितंबर 2025 को आरोप लगाया था कि राज्य में YSR कांग्रेस सरकार में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले लड्डू (प्रसादम्) में जानवरों की चर्बी वाला घी और फिश ऑयल मिलाया गया था। इसके अगले दिन TDP ने एक लैब रिपोर्ट दिखाकर अपने आरोपों की पुष्टि का दावा किया। जानिए क्या है तिरुपति लड्डू का इतिहास तिरुमाला मंदिर में रोजाना 3.5 लाख से ज्यादा भक्तों को लड्डू प्रसाद दिया जाता है। यह परंपरा 1715 से, यानी 300 से अधिक सालों से चली आ रही है। प्रसाद मंदिर की रसोई पोट्टु में तैयार होता है, जहां पारंपरिक समुदाय के कारीगर पीढ़ियों से इसे बनाने की कला को आगे बढ़ा रहे हैं। लड्डू को भक्तों को देने से पहले सबसे पहले भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित किया जाता है। लड्डू बनाने के प्रोसेस को दित्तम कहते हैं लड्डू बनाने की प्रोसेस को दित्तम कहा जाता है। इसमें कौन सी चीज कितनी मात्रा में डालनी है इसका बहुत सख्ती से पालन किया जाता है। इतने लंबे समय में लड्डू की रेसिपी में सिर्फ छह बार ही बदलाव किए गए हैं। पहले लड्डू बेसन और गुड़ की चाशनी से बनते थे, ताकि वे ज्यादा समय तक ठीक रहें। बाद में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें बादाम, काजू और किशमिश भी मिलाना शुरू किया गया। —————- ये खबर भी पढ़ें… तिरुपति मंदिर में लड्डू के बाद दुपट्टा में घोटाला: सिल्क बताकर ₹350 के पॉलिएस्टर दुपट्टे ₹1300 में बेचे; 10 साल में ₹54 करोड़ का स्कैम आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित तिरुमला के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में लड्डू के बाद प्रसाद के तौर पर दिए जाने वाले दुपट्टे (अंगवस्त्रम) की बिक्री में घोटाला सामने आया है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, एक कॉन्ट्रैक्टर ने शुद्ध मुलबेरी सिल्क दुपट्टों की जगह लगातार 100% पॉलिएस्टर दुपट्टे सप्लाई किए। एक पॉलिएस्टर दुपट्टे की वास्तविक कीमत लगभग ₹350 थी। लेकिन, तिरुमला मंदिर का प्रबंधन करने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) को वही ₹350 का दुपट्टा ₹1,300 में बेचा गया। पूरी खबर पढ़ें…


