सीहोर जिले सत्र न्यायालय ने 27 साल पुराने एक बीमा घोटाले में 39 लोगों को सजा सुनाई है। इनमें से 28 लोगों को जिला जेल भेज दिया गया है, जबकि एक अभियुक्त बीमार होने के कारण अस्पताल में भर्ती है। इस मामले में 9 आरोपियों की केस के दौरान मौत हो चुकी है। यह मामला वर्ष 1998 का है, जब आईआरडीपी बीमा योजना में सीहोर, शाजापुर और राजगढ़ जिलों में जिला सहकारी बैंक समितियों में फर्जी दस्तावेज लगाकर 72 लाख रुपए की राशि का आहरण किया गया था। समितियों में जिम्मेदार लोगों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र देकर बीमा क्लेम राशि का आहरण किया था। 1485 खातों की जांच की गई थी इस मामले की शिकायत पहले सारंगपुर थाने में की गई थी, बाद में इसे ईओडब्ल्यू को सौंप दिया गया था। इस पूरे मामले में 1485 खातों की जांच की गई थी। इसमें बीमा कंपनी एलआईसी और सेंट्रल बैंक को नोडल एजेंसी बनाया गया था। जिला सहकारी बैंक, साख सहकारी समितियां और एलआईसी के अधिकारियों को यह सजा सुनाई गई है।


