पंजाब के टूरिस्ट डेस्टीनेशन मिनी गोवा चमरोड़ में अवैध रूप से बने तिमंजिला होटल को ढहाने के लिए क्लीन चिट मिल गया है। डेढ़ साल की सुनवाई के बाद पूडा ने होटल डिमोलिशन करने के ऑर्डर के खिलाफ मालिक की अपील को खारिज कर दिया है। होटल की बिल्डिंग भाजपा विधायक रणबीर सिंह निवासी नूरपुर (हिमाचल) के नाम पर है। 4 साल पहले ‘पताया बीच’ ईको हट्स के नाम से वन विभाग व पूडा में एनओसी और सीएलयू के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन बिना मंजूरी और एनओसी के वहां तिमंजिला बिल्डिंग खड़ी की गई थी। वन विभाग, पूडा और प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे रहे। भास्कर ने 19 अप्रैल, 2022 को मामले संबंधी खबर प्रकाशित की थी। पूडा के एडीशनल सेक्रेटरी ने बिल्डिंग को ढहाने के लिए क्लीन चिट दिया है। अब कोर्ट जाने का रास्ता नहीं बचा है, क्योंकि कोर्ट ने होटल मालिक की अपील रद्द कर एडिशनल सेक्रेटरी को सुनवाई के लिए अधिकृत किया था। झील के आसपास का ज्यादातर एरिया पीएलपीए (पंजाब लैंड प्रिजर्वेशन एक्ट की धारा-4) में आता है, वहां कोई कमर्शियल गतिविधि नहीं हो सकती है। बिना मंजूरी मिलीभगत से होटल का निर्माण जारी रखा अधिकारियों के मुताबिक कुछ एरिया डीलिस्टेट है, वहां वन-पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी और कई विभागों की एनओसी के बगैर कॉमर्शियल निर्माण अवैध है। ‘पताया बीच’ में ईको हट्स के नाम पर फॉरेस्ट से एनओसी के लिए मंजूरी मांगी गई थी, लेकिन बिना मंजूरी अधिकारियों की मिलीभगत से निर्माण जारी रखा था। पंजाब अर्बन डेवलपमेंट (पूडा) ने सीएलयू नहीं दिया। रणबीर सिंह ने 0.222 हैक्टेयर एरिया में निर्माण को केस अप्लाई किया गया, पर मंजूरी नहीं मिली। 2023 में चीफ एडमिनिस्ट्रेटर पूडा (अमृतसर) ने बिल्डिंग ढहाने का ऑर्डर पास कर डीसी पठानकोट के पास भेजा। रणबीर सिंह यह कहकर हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर ले आए कि केस को पूरी तरह सुना नहीं गया है। कोर्ट ने ऑर्डर दिया कि आप अपील डालिए, पूडा के एडिशनल सेक्रेटरी (चंडीगढ़) मामले की सुनवाई करेंगे और वही फैसला लेंगे। इधर, डीसी आदित्य उप्पल ने कहा कि वह ऑर्डर को देखेंगे, उसी मुताबिक डिमोलिशन संबंधी ऑर्डर किया जाएगा। वन विभाग ने नूरपुर के मौजूदा भाजपा विधायक के नाम पर 25 मार्च, 2022 को नोटिस भेजा था, जिसमें निर्माण बंद करने को कहा गया था। हालांकि बाद में भी बिल्डिंग का निर्माण होता रहा। वन विभाग का कहना था कि हदबस्त नं.-402 खसरा नं.-611, 613 में बनाई जा रही बिल्डिंग की वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की परवानगी नहीं ली गई है और भूमि सुरक्षा एक्ट, फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट व सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की उल्लंघना की गई है। बाद में पूडा ने सीएलयू को खारिज कर दिया था।


