भास्कर न्यूज| चाईबासा कोल्हान के अधिकतर हो आदिवासी बहुल गांवों में माघे पर्व की तैयारी शुरू हो गई है। आदिवासी हो समाज महासभा द्वारा इस वर्ष 12 फरवरी को माघे पर्व की तिथि निर्धारित की गई है। हालांकि सभी गांव में अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग तिथियों में माघे परब मनाने की पुरानी परंपरा है। 11 फरवरी से आरंभ हो रही मैट्रिक और इंटर की परीक्षा को देखते हुए कई गांव के बुद्धिजीवी जागरूक हो समाज के लोग एग्जाम खत्म होने के बाद मार्च माह में माघे परब मनाएंगे। क्योंकि माघे परब के बीच बच्चे परीक्षा की तैयारी ठीक से नहीं कर पाएंगे। आमतौर पर फरवरी तथा मार्च महीने में सर्वाधिक गांवों में माघे पर्व मनाया जाता है। इसके लिए ग्रामीण अपनी सुविधाओं को देखते हुए आपसी विचार-विमर्श कर तय करते हैं। परब मानने से पूर्व पूरे गांव के लोगों के सहयोग से दिऊरी पुजारी के घर की मरम्मत करते हैं। साथ ही गांवों में लोग अपने मिट्टी के घरों का रंगरोगन करते हैं। बहरहाल कोल्हान के कई गांवों में माघे परब की तैयारी चल रही है। ग्रामीण पूजा स्थल देशाऊली का श्रमदान कर सफाई कर रहे हैं। पारंपरिक खेलकूद मैदान तथा सामूहिक नृत्य अखाड़ों को भी दुरुस्त किया जा रहा है। माघे पर्व के तीसरे दिन हारमागेया पर्व के मौके पर वार्षिक खेलकूद की परंपरा है। वहीं मादर व नगाड़ों की मरम्मत लोग करा रहे हैं।


