राज्य की सभी यूनिवर्सिटी में नीड बेस्ड लेक्चरर की नियुक्ति पर रोक

लिखा-राज्य के अभ्यर्थियों का सही प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की शिकायत उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने रांची यूनिवर्सिटी समेत राज्य के 10 विश्वविद्यालयों में नीड बेस्ड लेक्चरर (असिस्टेंट प्रोफेसर) की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। इस संबंध में उच्च शिक्षा निदेशक रामनिवास यादव ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेज दिया है। पत्र में कहा है कि रांची यूनिवर्सिटी में नीड बेस्ड लेक्चरर नियुक्ति के साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी की गई है। इसमें झारखंड के अभ्यर्थियों का समुचित अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं है। सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यमों से जानकारी मिली है कि नीड बेस्ड नियुक्ति में कुछ बिंदुओं पर आपत्तियां दिख रही हैं। इधर, रांची यूनिवर्सिटी में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए एक पद के विरुद्ध पांच अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट जारी की गई है। -शेष पेज 13 पर बंधु तिर्की और एनएसयूआई ने की थी शिकायत रांची यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. अजीत कुमार सिन्हा से पूर्व विधायक बंधु तिर्की, एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमन अहमद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मिला था। इनका कहना था कि ओपन सीटों पर राज्य के अभ्यर्थी को जगह नहीं मिल रही है। नियुक्ति नोडल पदाधिकारी डॉ. विनोद नारायण ने इन्हें बताया कि सरकार द्वारा गजट में प्रकाशित रेगुलेशन के अनुसार नियुक्ति हो रही है। तब बंधु ने नियुक्ति रोकने के लिए सरकार से मिलने की बात कही थी। रांची विवि में 178 अनारक्षित और 120 पद हैं आरक्षित रांची यूनिवर्सिटी में 25 विषयों में 298 पदों पर नियुक्ति होनी है। इसमें 178 अनारक्षित और 120 पद आरक्षित हैं। विवि के आंकड़ों के अनुसार कुल 1490 अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होगा, जिसमें झारखंड के 1115 अभ्यर्थी हैं। वहीं 375 अभ्यर्थी दूसरे राज्यों के हैं। यानि लगभग 75 प्रतिशत झारखंड के हैं। हिंदी विषय में ओपन सीटों में सबसे अधिक राज्य के बाहर के अभ्यर्थी हैं। कई कॉलेजों में सैकड़ों छात्र, लेकिन एक भी शिक्षक नहीं रांची यूनिवर्सिटी के कई नए मॉडल कॉलेजों, महिला कॉलेजों में एक भी शिक्षक नहीं है। मॉडल कॉलेज लोहरदगा, महिला कॉलेज लोहरदगा समेत अन्य कॉलेज शामिल हैं। वीमेंस कॉलेज लोहरदगा में 500 स्टूडेंट्स हैं। लेकिन एक भी शिक्षक नहीं है। छात्र आजसू के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा भी वीसी से मिलकर कहा कि राज्य के अभ्यर्थियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।

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