टीचर एजुकेशन के भविष्य पर राष्ट्रीय मंथन, एनईपी-आईटीईपी पर व्यापक विमर्श, वक्ताओं ने विचार रखे

भास्कर न्यूज | हजारीबाग शिक्षक प्रशिक्षण में हो रहे बदलाव को लेकर गौतम बुद्ध शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, मुकुंदगंज में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का प्रारंभ हुआ। इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के तहत टीचर एजुकेशन का भविष्य विषयक सेमिनार में बहुविषयक अध्ययन, मूल्य-आधारित शिक्षण, नवाचार और शोध की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर वक्ताओं ने अपने विचारों को रखा। सेमिनार का उद्घाटन विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान केवल पाठ्यक्रम पूर्ण कराने या डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षा की दिशा और गुणवत्ता तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएड महाविद्यालयों को नवाचार, रचनात्मक चिंतन, शोध और नेतृत्व निर्माण के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करना आवश्यक है। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. वंदना सक्सेना ने युवाओं की सक्रिय भागीदारी को शैक्षणिक परिवर्तन की कुंजी बताते हुए कहा कि एनईपी–2020 शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला, समावेशी और रोजगारोन्मुख बनाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष मनोज कुमार सचिव मिथिलेश मिश्र ने भी संबोधित किया। संचालन कुमारी अंजलि और धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य डॉ. बसुंधरा कुमारी ने किया। केवल डिग्री प्रदान करना शिक्षा का उद्देश्य नहीं : कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला ने शिक्षा के मानवीय पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि केवल सूचना या डिग्री प्रदान करना शिक्षा का उद्देश्य नहीं हो सकता। संस्कार, नैतिकता, करुणा और संवेदनशीलता जैसे मूल्यों का समावेश ही शिक्षा को पूर्ण बनाता है। उनके अनुसार राष्ट्र निर्माण में वही शिक्षक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं, जो ज्ञान के साथ चरित्र निर्माण को भी प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों वैश्विक जरूरत के अनुसार तैयार करना है। पैटर्न वाले से देश का भला नहीं हा़े सकता है। नए कोर्स में भी आवश्यकता पड़ने पर बदलाव किया सकता है। इस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *