ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में ‘कम दाम का लालच’ देकर ऑर्डर कैंसिल करना और फिर उसी सामान को महंगे दाम पर बेचना अब ई-कॉमर्स कंपनियों को भारी पड़ सकता है। झुंझुनू जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने फ्लिपकार्ट और उसकी सहयोगी कंपनी इंस्टाकार्ट सर्विसेज पर सख्त रुख अपनाते हुए 13,800 का जुर्माना ठोका है। आयोग ने कंपनी की इस कार्यप्रणाली को ‘डार्क पैटर्न’ (छद्म व्यापार रणनीति) करार देते हुए इसे डिजिटल इंडिया की पवित्रता को खंडित करने वाला प्रयास बताया है। यह था पूरा मामला आनंदपुरा निवासी लोकेश सिंह ने फ्लिपकार्ट से 902 में एक ट्रिमर बुक किया था। कंपनी ने ऑर्डर स्वीकार किया और भुगतान भी ले लिया। लेकिन कुछ समय बाद, बिना ग्राहक की सहमति या सूचना के, फ्लिपकार्ट ने ऑर्डर कैंसिल कर दिया। हैरानी की बात तब सामने आई जब वही ट्रिमर प्लेटफॉर्म पर 2,097 में बिकने लगा। जब प्रार्थी ने पुराने दाम पर सामान ममांगा, तो कंपनी ने इनकार कर दिया। आयोग की तल्ख टिप्पणी: “यह डार्क पैटर्न है” मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील और सदस्य प्रमेंद्र कुमार सैनी की पीठ ने कहा कि यह केवल सेवा में कमी नहीं, बल्कि ग्राहकों के साथ धोखा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि सस्ते दाम पर ऑर्डर लेकर उसे कैंसिल करना और फिर ऊंचे दाम पर बेचना ‘डार्क पैटर्न’ की श्रेणी में आता है। यह कृत्य डिजिटल इंडिया के तहत ई-कॉमर्स में पारदर्शिता और ग्राहकों के भरोसे को कमजोर करता है। कंपनियों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे तकनीक का दुरुपयोग कर उपभोक्ताओं का शोषण न करें। कंपनी के तर्कों को आयोग ने किया खारिज सुनवाई के दौरान फ्लिपकार्ट ने अपना पल्ला झाड़ते हुए खुद को महज एक ‘मार्केटप्लेस’ बताया और सारा दोष विक्रेता (सेलर) पर मढ़ दिया। कंपनी ने पिनकोड की समस्या का भी बहाना बनाया, लेकिन आयोग ने इसे सिरे से नकार दिया। आयोग ने पाया कि ग्राहक को डिलीवरी में देरी का संदेश दिया गया था, न कि पिनकोड की किसी समस्या का। यह विरोधाभास कंपनी की बदनीयती को उजागर करने के लिए पर्याप्त था। मुआवजे का विवरण यद्यपि कंपनी ने ऑर्डर की राशि लौटा दी थी, लेकिन ग्राहक को हुई मानसिक पीड़ा और कानूनी लड़ाई के बदले आयोग ने आदेश दिए। मानसिक संताप और असुविधा के लिए: 10,500 न्यायिक व्यय (कोर्ट खर्च): 3,300 कुल जुर्माना: 13,800


