राजस्थान क्रिकेट संघ को एडहॉक चला रही है। कमेटी का काम चुनाव कराना है, लेकिन अभी पक्ष में जमीन तैयार नहीं हुई है, इसलिए चुनाव संभव नहीं है। कवायद शुरू हो गई है। जिन जिलों में भाजपा कमजोर है, उनमें भी एडहॉक कमेटी बनाकर जमीन तैयार की जा रही है। कोटा में अमीन पठान को हटाकर एडहॉक कमेटी बन गई। जोधपुर में भी विवाद हुआ तो एडहॉक बना दी। जयपुर और चित्तौड़ में पहले से यही है। कांग्रेस समर्थित करौली में जांच के आदेश हो गए हैं। अध्यक्ष पद पहले से खाली है। यहां भी एडहॉक बनाकर अपने को बिठाया जा सकता है। इसी तरह बांसवाड़ा, पाली और बीकानेर जिलों को लेकर भी शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें भी वही होगा। बीकानेर में भी अध्यक्ष की कुर्सी खाली है। दरअसल, आरसीए चुनाव में वोटिंग सिर्फ जिला क्रिकेट संघ के सचिव ही कर सकते हैं। विवाद का सबसे बड़ा कारण यही है। अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष को वोटिंग राइट हों तो 33 जिलों में 99 वोट होंगे। फिर इतने लोगों को मैनेज करना आसान नहीं होगा। पूर्व कैबिनेट मंत्री दिगंबर सिंह के बेटे डॉ. शैलेश सिंह (विधायक) उर्फ शैली और एक होटलियर भगत सिंह भी डीग जिले से आरसीए का रुख करने का मन बना रहे हैं। कुछ दिन पहले ही भरतपुर के अध्यक्ष अरुण सिंह ने भी निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया था। यह है वोटों का पूरा गणित… नए जिले ही नैया पार लगाएंगे, अध्यक्ष भी इनसे संभव 8 नए जिले बालोतरा, डीडवाना, फलौदी, सलूंबर, खैरथल-तिजारा, डीग, कोटपूतली-बहरोड़ और ब्यावर हैं। अब ये ही आरसीए के चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। हो सकता है कि इन्हीं में से किसी जिले से आरसीए का कोई नया अध्यक्ष सामने आए। कई जिलों से लोग अपनी-अपनी दावेदारी के लिए आरसीए से संपर्क कर रहे हैं। 4 नए जिलों का रजिस्ट्रेशन हुआ, लेकिन प्रक्रिया फिर से होगी वैभव गहलोत की अध्यक्षता वाले आरसीए ने 4 नए जिलों खैरथल, गंगापुरसिटी, डीडवाना और बालोतरा को भी मान्यता दी गई थी। इनका रजिस्ट्रेशन सहकारिता विभाग से भी हो गया था। हालांकि, भाजपा सरकार आने पर जिलों की संख्या कम कर दी गई, इसलिए पूरी प्रक्रिया फिर से होगी। क्योंकि, ईजीएम बुलाकर ही नए जिलों को मान्यता दी जा सकती है। समाधान क्या
दिल्ली-मुंबई की तरह वोटर्स की संख्या बढ़े पूर्व में बनी एडहॉक कमेटी के कन्वीनर रहे एक जिला संघ सचिव ने कहा कि दिल्ली, मुंबई जैसे राज्यों में वोटर्स की संख्या बहुत ज्यादा है इसलिए वहां ज्यादा झगड़े नहीं होते। हालांकि, प्रदेश में ऐसा करना है तो स्पोर्ट्स एक्ट में बदलाव करना पड़ेगा।


