फोन पर बोला-आपकी पत्नी के लिवर में सूजन…5 हजार भेजो:भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉक्टर बनकर ठगी; 10 मरीजों से हजारों रुपए ट्रांसफर कराए

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक खास तरीका अपनाकर ऑनलाइन ठगी की गई। शातिर ठग ने यहां भर्ती मरीजों और उनके परिजन को डॉक्टर बनकर फोन किया। बेहतर इलाज और सुरक्षित ऑपरेशन का झांसा देकर रकम की डिमांड की। क्यूआर कोड भेजकर पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिया। आरोपी पिछले 45 दिन में इसी तरीके से 10 पेशेंट को शिकार बना चुका है। उसने हर एक परिवार से 7 से 10 हजार रुपए तक की वसूली की। वह मरीजों और उनके परिजन को फोन कर कहता था कि यदि बेहतर इलाज और सुरक्षित ऑपरेशन चाहते हैं, तो तय रकम तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर करनी होगी। भरोसे में आकर कई लोगों ने रकम ट्रांसफर कर दी, जिसके बाद आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया। मामले में अस्पताल के स्टाफ की मिलीभगत भी सामने आई है, जो मरीजों की मेडिकल कंडीशन से जुड़ी जानकारी ठग को उपलब्ध कराता था। इसी जानकारी के आधार पर आरोपी फोन करता था, जिससे परिजन झांसे में आ जाते थे। पुलिस ने आरोपी जितेंद्र खाकरे को गुरुवार को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार शाम उसे भोपाल के कोहेफिजा थाने लाया गया। इसके बाद हमीदिया अस्पताल प्रबंधन और ठगी का शिकार बने मरीज एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे। मरीजों ने की अस्पताल अधीक्षक से शिकायत
हमीदिया अस्पताल के सिक्योरिटी इंचार्ज जयंत भारद्वाज ने कहा- करीब एक सप्ताह पहले एक मरीज ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन से ठगी की शिकायत की थी। इसके अगले ही दिन दूसरे मरीज के परिजन भी शिकायत लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि किसी ने डॉक्टर बनकर फोन किया और बेहतर इलाज के नाम पर 10 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद कॉल रिसीव नहीं कर रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लिया। जांच में सामने आया कि जनवरी से अब तक करीब 10 मरीजों को इसी तरह ठगा जा चुका है। इसके बाद पूरे मामले की सूचना साइबर क्राइम और क्राइम ब्रांच को दी गई। पत्नी के लिवर में सूजन बताकर 5 हजार लिए
ठगी के शिकार विनोद अहिरवार ने बताया कि उनकी पत्नी हमीदिया अस्पताल में बीते एक सप्ताह से भर्ती है। उनको एक कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को हमीदिया अस्पताल का डॉ. अर्णव बताया। उसने विनोद से कहा कि आपकी पत्नी के लिवर में सूजन है, जिसकी कुछ दवाएं बाहर से आएंगी। इसके लिए 5 हजार रुपए क्यूआर कोड पर भेज दीजिए। विनोद ने रकम भेजने के थोड़ी देर बाद जब कॉल करके दवा की जानकारी मांगनी चाही तो उसका फोन नंबर ब्लॉक कर दिया गया था। अस्पताल अधीक्षक ने बनाई पकड़ने की रणनीति
आरोपी तक पहुंचने के लिए अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने एक रणनीति बनाई। पीड़ित मरीज के जरिए ठग को दोबारा संपर्क करने के लिए लालच दिया गया। जैसे ही आरोपी ने कॉल और पैसे को लेकर बातचीत शुरू की, उसकी जानकारी तुरंत क्राइम ब्रांच को दी गई। इसके बाद आरोपी के मोबाइल नंबर को ट्रेसिंग पर ले लिया गया। 3 दिन की ट्रेसिंग के बाद पकड़ में आया आरोपी
साइबर क्राइम ने तीन दिन तक आरोपी के मोबाइल नंबर को ट्रेस किया। गुरुवार शाम आरोपी की लोकेशन इंदौर में मिली। घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार किया गया। फिलहाल, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस ठगी में और कौन-कौन शामिल है? स्टाफ की मिलीभगत से चल रहा था ठगी का नेटवर्क
कोहेफिजा पुलिस ने बताया कि आरोपी जितेंद्र खाकरे (36) बैतूल का रहने वाला है। ठगी का पूरा नेटवर्क अस्पताल के ही कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा था। वे आरोपी को मरीजों की जानकारी उपलब्ध कराते थे। जिससे मरीज का नाम, उसकी मेडिकल कंडीशन, कब ऑपरेशन होना है, इलाज में किन सामान की जरूरत है, ऐसी सभी जानकारी ठग को मिल जाती थी। इसके आधार पर वह मरीज को डॉक्टर बनकर कॉल करता था। ये खबर भी पढ़ें… 10 से 15 हजार में बिकते हैं बैंक अकाउंट, साइबर ठग ने खोला राज हम सीधे ठगी नहीं करते, पहले भरोसा बनाते हैं। जब खिलाड़ी लाखों लगाने लगता है, तभी असली खेल शुरू होता है। यह कबूलनामा साइबर ठग का है, जो महादेव गेमिंग-बेटिंग जैसे ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से जुड़ा रहा है। इस नेटवर्क की सबसे मजबूत कड़ी हैं वे बैंक अकाउंट, जो 10 से 15 हजार रुपए में खरीदे जाते हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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