देश भर में शनिवार को एप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (गिग वर्कर्स) की हड़ताल की घोषणा का मिलाजुला असर जयपुर में देखने को मिला। जहां हड़ताल से जुड़े ड्राइवरों ने जयपुर में कैब और बाइक टैक्सिया चलती नजर आई। वहीं कुछ ड्राइवरों ने हड़ताल को समर्थन देते हुए कहा- ओला, उबर, रैपिडो जैसी कंपनियां किराया मनमाने तरीके से तय कर रही हैं, जिससे ड्राइवरों को नुकसान हो रहा है। क्रांतिकारी टैक्सी ड्राइवर यूनियन एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह रत्नू ने बताया कि क्रांतिकारी टैक्सी ड्राइवर एसोसिएशन और बाइक टैक्सी ड्राइवर युनियन एसोसिएशन सहित जयपर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गाड़ी चला रहे ड्राइवर दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने दावा किया कि जयपुर में भी 3 से 4 हजार बाइक और 10 हजार टैक्सी कार हड़ताल के चलते बंद है। हम अभी दो मांगों को लेकर दिल्ली जंतर मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए है। जिनमें पहली मांग मिनिमम किराया निति को लागू किया जाए। दूसरी मांग प्राइवेट नंबर के व्हीकल को बैन किया जाए। हमारा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि हमारी मांगों को माना नहीं जाता। उन्होंने कहा- जयपुर में करीब 30 हजार बाइक, 40000 हजार टैक्सी और कार 10000 सहित करीब 80 हजार व्हीकल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चलाए जाते है। हालांकि जहा ज्यादार एप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ने हड़ताल को समर्थन दिया। वहीं ओला, उबर, रैपिडो जैसी कंपनियों के लिए जयपुर में कैब और बाइक टैक्सिया चलती नजर आई। जयपुर के आमेर, रामगढ़ मोड़, सुभाषचौक, बड़ी चौपड़, चारदिवारी इलाके, चांदपोल, सांगानेरी गेट, राजापार्क, जवाहर नगर, नारायण सर्किल, जगतपुरा, मानसरोवर और सांगानेर सहित कई इलाकों में में कैब और बाइक टैक्सिया चलती नजर आई। इस दौरान ज्यादातर ड्राइवर कुछ बोलने से बचते नजर आए। कुछ ने अपना चेहरा छुपाया तो कुछ हमें नहीं बोलना कहकर टाल गए। कैब ड्राइवर पिंटू स्वामी ने बताया- जयपुर में ओला उबेर रैपिडो जैसी कंपनियों के लिए गाड़ियां चल रही है। उन्होंने कहा- वैसे आज हमारी स्ट्राइक भी चल रही है। उन्होंने कहा- बड़ी संख्या में लोग दिल्ली में चल रहे धरना प्रदर्शन में शामिल हुए है। उन्होंने कहा- कंपनियां केब ड्राइवर का बड़ा हक खुद रखती है। 3 किलोमीटर यात्री को लेने जाए फिर दस किलोमीटर पर छोड़ने पर हमें केवल 100 रुपए मिलते है। कंपनिया पैमेंट दे नहीं रही है। हालांकि उन्होंने सहकारिता की ओर से लाई गई भारत टैक्सी को लेकर किसी तरह का विरोध नहीं बताया। वहीं जयपुर में ओला उबेर या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से गाड़ी बुक हो रही है या नहीं इसका रियलटी चैक करने पर नारायाण सर्किल से 200 फीट बाइसपास जाने वाले यात्री ने बातचीत में बताया- ओला, उबेर, रैपिड़ों से गाड़ियां बुक हो रही है। उन्होंने रैपिडो से टूव्हिलर बुक किया। जिसका बुकिंग अमाउंट 200 रुपए आया। इसी के साथ कुछ अन्य ड्राइवरों से बातचीत करने की कोशिश की तो ड्राइवर अपना चेहरा छुपाते नजर आए। तो किसी ने बात करने से इंकार कर दिया। हालांकि इस बीच यह भी देखने में आया कि यात्रियों से लंबी दूरी पर तय रुपए से ज्यादा किराया वसूला जा रहा था। कैब से यात्रा कर रही मनीषा कटारिया ने बताया- वे बड़ी चौपड़ से न्यू सांगानेर के लिए कैब बुक की है। कैब में बुक करने पर जो अमाउंट आया उस पर एड मनी का ऑप्शन आता है। ऐसे में 15 मीनट तक गाड़ी के लिए रिक्वेस्ट किसी ड्राइवर की ओर से एक्सेप्ट नहीं करने पर उन्होंने 50 रुपए एड किए तब जाकर उनकी बुकिंग कंफर्म हुई। ये हैं दो प्रमुख मांगें ऑटो, कैब, बाइक टैक्सी और दूसरी एग्रीगेटर-आधारित सेवाओं सहित एप-आधारित ट्रांसपोर्ट सेवाओं के लिए न्यूनतम बेस किराए की तुरंत घोषणा हो। ये किराए मान्यता प्राप्त ड्राइवर और वर्कर यूनियनों से सलाह कर तय किए जाएं। मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 का पालन हो। कॉमर्शियल यात्री और माल ट्रांसपोर्ट के लिए निजी, गैर-कॉमर्शियल गाड़ियों के इस्तेमाल पर सख्त रोक। यह तरीका लाइसेंसी ड्राइवरों को नुकसान पहुंचाता है और कमाई के दबाव को बढ़ाता है। 40% गिग वर्कर्स महीने में 15 हजार रु. से कम कमा रहे 2025-26 के इकोनॉमिक सर्वे में गिग वर्कर की कमाई पर चिंता जताई। इसमें कहा गया कि भारत की गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इनकम में अस्थिरता बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सर्वे के अनुसार 40% गिग वर्कर्स महीने में 15,000 रु. से कम कमाते हैं। वर्ष 2021 में इनकी संख्या 77 लाख थी, जो 2025 में 1.2 करोड़ हो गई। गिग इकॉनमी भारत की कुल कमाई का 2% से ज्यादा हिस्सा है।


