खैरागढ़ में मां नर्मदा के ऐतिहासिक मंदिर में चार दिवसीय भव्य महोत्सव का आगाज हो गया है। माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर हर साल आयोजित होने वाले इस मेले की पौराणिक महत्ता दूर-दूर तक विख्यात है। वर्तमान में जिला प्रशासन ने मेले के आयोजन को भव्य रूप दिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिनमें आकर्षक लाइट की व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, मेडिकल फैसलिटी और पूजा-अर्चना की व्यवस्था शामिल है। मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा के मुताबिक, खैरागढ़ रियासत काल में रूक्कड़ स्वामी नामक संत मां नर्मदा की आराधना के लिए हर माह अमरकंटक की यात्रा करते थे। उनकी अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर मां नर्मदा ने खैरागढ़ में प्रकट होने का निर्णय लिया। ऐसे बना पवित्र कुंड कहा जाता है कि जब मां नर्मदा खैरा गांव से गुजर रही थीं, तब एक चरवाहे द्वारा अपनी गाय ‘नर्मदा’ को पुकारने पर वहीं रुक गईं और उसी स्थान पर एक पवित्र कुंड के रूप में प्रकट हो गईं। सैकड़ों सालों की परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही इस परंपरा में हर साल लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से मां नर्मदा के दर्शन के लिए आते हैं। भक्तों की बढ़ती संख्या इस पावन स्थल की आध्यात्मिक महत्ता को प्रमाणित करती है। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी अनूठा उदाहरण है।


