इंडियन आर्मी के जवान सरदार मेजर अर्शदीप सिंह गिल को सेना के कीर्ति चक्र सम्मान से नवाजा जाएगा। यह भारत का दूसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता सम्मान है, जो उनकी असाधारण बहादुरी और नेतृत्व क्षमता के लिए दिया जाएगा। मेजर अर्शदीप अभी ‘द आर्मर्ड कोर असम राइफल्स (यूनिट) लालगढ़ जाटान आर्मी कैंट (श्रीगंगानगर) में तैनात हैं। इंडो-म्यांमार बॉर्डर पर दुश्मनों के ठिकानों को किया था तबाह
14 मई 2025 को इंडो-म्यांमार बॉर्डर (IMB) पर बॉर्डर फेंसिंग निर्माण में लगे मजदूरों की सुरक्षा के लिए स्पेशल पैट्रोल का नेतृत्व कर रहे मेजर अर्शदीप सिंह पर अचानक ऊंचाई वाली पोजीशन से बिना उकसावे के गोलीबारी शुरू हो गई। घने जंगल के बीच भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। साहस दिखाते हुए उन्होंने टीम को लेकर दुश्मन की मजबूत पोजीशन पर चढ़ाई की और काउंटर-अटैक शुरू कर दिया। इसके बाद घने पत्तों के बीच रेंगते हुए उन्होंने एक रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) लॉन्चर से लैस कैडर को चुपके से तबाह कर दिया। इसके बाद दो और सशस्त्र कैडरों की गोलीबारी का सामना करते हुए उन्होंने तेजी से साइड रोल किया और सटीक फायरिंग से दोनों को निष्क्रिय कर दिया। स्थिति पर कब्जा बनाए रखते हुए उन्होंने छिपे हुए बाकी कैडरों को पहचाना और गोलीबारी के बीच आगे बढ़कर दो और दुश्मनों को मार गिराया। श्रीगंगानगर जिले के आर्मी कैंट में तैनात
अर्शदीप के निर्भीक नेतृत्व, असाधारण वीरता और अटूट संकल्प के कारण दुश्मन के कई सशस्त्र कैडर मारे गए, जबकि उनकी पूरी टीम सुरक्षित रही और कोई नुकसान नहीं हुआ। मेजर अर्शदीप सिंह गिल मूल रूप से पंजाब के फिरोजपुर जिले के गांव टालीवाला के रहने वाले हैं। फिलहाल वे श्रीगंगानगर जिले के लालगढ़ जाटान आर्मी कैंट में तैनात हैं। शुक्रवार को उनके गांव टालीवाला के ग्रामीण लालगढ़ जाटान पहुंचे और उन्हें सिरोपा पहनाकर व तलवार भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. सुखदेव सिंह गिल, सरपंच मौड़ा सिंह, जस्सा सिंह (मेम्बर), पिप्पल सिंह, चैनचल सिंह कई ग्रामीण मौजूद रहे।


