अनूपपुर जिले के कोतमा वन परिक्षेत्र अंतर्गत आमाडांड ग्राम पंचायत भवन के पास एक खंडहरनुमा मकान में दो शावकों को जन्म देने वाली मादा भालू अब अपने बच्चों के साथ जंगल लौट गई है। लगभग 30 दिन पहले इस मादा भालू ने यहां शावकों को जन्म दिया था। संभावना है कि मादा भालू ने शुक्रवार रात को यह खंडहरनुमा मकान छोड़ा। इसके बाद भालू और उसके बच्चों की निगरानी में लगे वन विभाग के सुरक्षाकर्मी शनिवार को वापस लौट गए। कोतमा वन परिक्षेत्र अधिकारी हरीश तिवारी ने बताया कि मादा भालू ने 9 जनवरी को यहां दो शावकों को जन्म दिया था। बच्चों की सुरक्षित देखरेख के लिए वह लगातार 30 दिनों तक यहीं रुकी रही। तिवारी ने आगे बताया कि शावकों के थोड़ा बड़े होने पर मादा भालू शुक्रवार-शनिवार की रात अपने दोनों बच्चों को लेकर मलगा के जंगल में चली गई। उन्होंने यह भी बताया कि मादा भालू के शावकों के जन्म से कुछ दिन पहले जैतहरी में एक सफेद भालू का शावक कुएं में गिरकर मर गया था। इसे देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने मादा भालू के शावकों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए थे। क्षेत्र में मौजूद है 700 भालू जानकारी के अनुसार, अनूपपुर जिले के जैतहरी, कोतमा और बिजुरी वन परिक्षेत्र में भालुओं की संख्या अधिक है। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, जिले में 600 से 700 भालू हैं। ये तीनों वन परिक्षेत्र छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से सटे और विस्तारित हैं, जिसके कारण भालुओं के रहवास क्षेत्र अंतर्गत लगभग 125-150 गांव भी प्रभावित होते हैं। परिक्षेत्र सहायक मलगा राजमणि सिंह ने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले मादा भालू को बच्चों के साथ खंडहर घर के आसपास घूमते देखा था। हालांकि, जन्म के समय ही एक ग्रामीण पर भालू द्वारा किए गए हमले के कारण ग्रामीण भालू से दूर ही रहते थे। भालू के वापस जंगल लौट जाने से अब ग्रामीणों ने भय से राहत महसूस की है।


