डीग जिले में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए ग्राम उत्थान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन एक दिवसीय शिविरों का आयोजन प्रत्येक गिरदावर सर्किल पर हो रहा है। जिला प्रशासन के नवीनतम प्रगति प्रतिवेदन के अनुसार अब तक 45 शिविरों के माध्यम से कुल 27 हजार 856 नागरिक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए हैं। जिले में शनिवार को खोह, अजान, कामां व कठौल गिरदावर सर्किल में विशेष शिविर आयोजित किए गए, जिनमें ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास से संबंधित योजनाओं को एक मंच पर लाकर ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। विभागीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि विभाग ने 15 हजार 371 किसानों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी है। इसके अतिरिक्त 3,449 सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित कर किसानों को मृदा परीक्षण के प्रति जागरूक किया गया। उद्यानिकी विभाग ने 7,958 कृषकों को लाभान्वित किया, जिसमें सोलर पंप और ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया गया। पशुपालन विभाग ने मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत 2,439 पशुपालकों का पंजीकरण किया। विभाग द्वारा 9,765 पशुओं का टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। सहकारिता विभाग को 560 नए किसान क्रेडिट कार्ड के आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होंगे। इन शिविरों में केवल विभागीय योजनाओं का लाभ ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि राजस्व विभाग द्वारा पुरानी भूमि समस्याओं का समाधान कर आवासीय पट्टे भी वितरित किए जा रहे हैं। पंचायती राज विभाग ने अब तक 522 स्वामित्व कार्डों का वितरण पूरा कर लिया है। जिला प्रशासन ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना जैसे नवाचारों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करें। इस योजना के तहत 10 लाख रुपए तक का अनुदान और 35 प्रतिशत सब्सिडी की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़ा जाए। अजान की गीता देवी को मिला आवासीय पट्टा जिले के ग्राम अजान में आयोजित ग्राम उत्थान शिविर में गीता देवी पत्नी सतवीर को उनके आवासीय भूमि का पट्टा प्रदान किया गया। इस पट्टे के मिलने से उनके परिवार की पीढ़ियों पुरानी अनिश्चितता समाप्त हो गई है। परिवार लंबे समय से अपनी पैतृक भूमि पर निवास कर रहा था, लेकिन मालिकाना हक का कोई वैधानिक दस्तावेज नहीं था।
ग्राम उत्थान शिविर के दौरान गीता देवी के आवेदन पर त्वरित कार्रवाई की गई। राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 157(1) के तहत उन्हें उनके घर का विधिवत ‘आवासीय भूमि पट्टा’ (पट्टा संख्या 42, पुस्तक संख्या 312) मौके पर ही वितरित किया गया। पट्टा मिलने से पहले, मालिकाना हक के अभाव में उन्हें अपने घर के पुनर्निर्माण के लिए बैंकों से ऋण नहीं मिल पा रहा था और न ही वे किसी सरकारी आवासीय योजना का लाभ उठा पा रही थीं।


