छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी और विवाद फिर से सामने आ गया है। इस बार मनरेगा बचाव संग्राम में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की तस्वीर गायब कर दी गई। इसे लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री विवादों से फंस गए हैं। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। संगठन सृजन के दौर में छत्तीसगढ़ में जिला व शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। जिसके बाद यह माना जा रहा था कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संगठन सृजन से पार्टी को नई ताकत मिलेगी और नवनियुक्त जिलाध्यक्ष सबके के साथ मिलकर काम करेंगे। लेकिन, बिलासपुर में कांग्रेस की गुटबाजी कम होने के बजाए बढ़ने लगी है। जिला स्तर ही नहीं अब प्रदेश स्तर पर खेमेबाजी शुरू हो गई है। यही वजह है कि पदाधिकारीपार्टी लाइन से हटकर अपनी मर्जी चलाने पर उतर आए हैं। बीते दिनों कोटा ब्लॉक में हुए मनरेगा बचाओ महासंग्राम में ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला। जिलाध्यक्ष महेंद्र, ब्लॉक अध्यक्ष अरुण त्रिवेदी व उनके समर्थक पदाधिकारियों ने मंच और बैनर में प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की तस्वीरें ही गायब कर दी। यह एक बड़ी चूक नहीं। बल्कि, जानबुझकर विवाद को हवा देने की कोशिश है। यही वजह है कि तो जिला अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन महामंत्री ने नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्हें इस मामले में तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। दरअसल, मनरेगा बचाओ संग्राम के के तहत कोटा ब्लॉक में पदयात्रा का आयोजन किया गया था। पदयात्रा में एआईसीसी के सचिव व प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी विजय जांगिड़ और मनरेगा बचाओ अभियान के प्रदेश समन्वयक व पूर्व मंत्री उमेश पटेल सहित नेता शामिल हुए थे। इस दौरान कोटा क्षेत्र में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने के लिए झंडा,बैनर और पोस्टर लगाए गए थे। जिसमें एआईसीसी के महासचिव व प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की तस्वीर गायब थी। कार्यक्रम में एक भी ऐसा पोस्टर व बैनर नहीं था, जिसमें दोनों दिग्गज नेताओं की फोटो नजर आई हो। अब पीसीसी ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 6 महीना समीक्षा की चेतावनी का भी असर नहीं कांग्रेस संगठन को सक्रिय और जवाबदेह बनाने की दिशा में पार्टी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति छह-छह महीने के परीक्षण कार्यकाल पर करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में नए जिलाध्यक्ष के छह महीने बाद कामकाज का मूल्यांकन किया जाएगा, जिसमें संगठनात्मक प्रदर्शन, जनसंपर्क, सदस्यता अभियान और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता को आधार बनाया जाएगा। जिन जिलाध्यक्षों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहेगा, उन्हें बदला जा सकेगा। लेकिन, इसके बाद भी पदाधिकारी अपने परफार्मेन्स पर ध्यान देने के बजाए गुटबाजी के विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। संवेदनहीन आयोजन की चर्चा दो दिन पहले सड़क दुर्घटना में कांग्रेस नेता सहित दो की मौत हो गई थी। जिसमें मस्तूरी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष को गंभीर हालत में अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दर्दनाक और दुखद घटना के बीच जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने शहर के एक होटल में ब्लॉक अध्यक्षों व चुनिंदा समर्थकों को भोज दिया था। इस संवेदनहीन भोज पॉलिटिक्स की बातें राजधानी तक पहुंच गई है। इसे लेकर भी चर्चा का दौर जारी है।


