जोधपुर नगर निगम (दक्षिण) की महापौर वनीता सेठ ने अपने कार्यकाल का 843.70 करोड़ का अंतिम बजट आज पेश किया लेकिन उस पर विपक्ष कांग्रेस पार्षदों से ज्यादा भाजपा विधायकों ने ही सवाल उठा दिए। सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी ने कहा कि निगम के अफसरों ने सभी को गुमराह करने का काम किया है। बजट में आम जनता के लिए कुछ नहीं है। इसी तरह शहर विधायक अतुल भंसाली ने भी बजट में सीएनजी पाइंट के लिए जगह चिह्नित करने के बिंदु पर चर्चा करते हुए कहा कि जिस कंपनी ने पूरे शहर की सड़कों को बर्बाद कर दिया है। उस पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है। आखिर उस कंपनी को मनमर्जी से सड़कें तोड़ने की अनुमति देता कौन है? निजी हॉस्पिटल को पार्किंग के लिए निगम की जमीन क्यों दे रहे हैं? बजट प्रस्ताव में महापौर ने शहर में कई जगहों पर पार्किंग की समस्या को लेकर चर्चा की। इस दौरान महापौर ने कहा कि एक हॉस्पिटल के बेसमेंट में पार्किंग की सुविधा है लेकिन लोग बाहर रोड पर गाड़ियां पार्क कर देते हैं। उस हॉस्पिटल के पास की निगम की जमीन किराए पर देंगे, तो यातायात सुगम हो सकेगा। इसी बिंदु पर सवाल उठाते हुए सूरसागर विधायक जोशी ने कहा कि एक बार निजी लोगों को जमीन किराए पर देने का सीधा मतलब है उस संपत्ति को हमेशा के लिए खोना। ये निजी हॉस्पिटल को फायदा पहुंचाने वाला कदम साबित होगा। इस पर महापौर ने उस प्रस्ताव को खारिज करने की बात कही। जितना संभव हो, उतना ही बजट बनना चाहिए शहर विधायक अतुल भंसाली ने भी बजट पर अपनी बात रखते हुए कहा- पिछले साल जितनी घोषणाएं की गई थी, उनका भी अता-पता नहीं है। अफसर यूं ही आ जाते हैं। ये बहुत गंभीर है। बजट प्रस्तावों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि न जाने क्यों, इतने बड़े-बड़े दावों वाले बजट क्यों तैयार किए जाते हैं। अपने सामर्थ्य और उपलब्ध संसाधनों के साथ सरकार से भी प्रैक्टिकल मांग के साथ प्रस्ताव तैयार होने चाहिए। शहर में अवैध पट्टे के मामलों पर सवाल उठाते हुए भंसाली ने कहा- कई मामले तो ऐसे हैं, जिनमें निगम की बैठकों से लेकर विधानसभा तक 10 से 12 बार अलग-अलग स्तर पर चर्चा हो चुकी है। इसके बावजूद निगम उन पट्टों को खारिज क्यों नहीं कर रहा है। अफसरों पर हर अहम कार्रवाई पूछकर करने का दबाव भी उचित नहीं बजट पर चर्चा के दौरान ही भाजपा व कांग्रेस के पार्षदों ने विभिन्न खामियों के चलते सीज की गई इमारतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा- निगम की ओर से सीज इमारतों को सीज मुक्त कराने के लिए कुछ दलाल सक्रिय हैं, जो जयपुर जाकर सशर्त तय समय सीमा में खामियों को दूर करने का शपथ-पत्र देकर सीज मुक्ति का आदेश ले आते हैं। उ उसके बाद 90 प्रतिशत मामलों में तय सीमा तो दूर महीनों या सालों बाद भी वो खामियां दूर नहीं होती है। इस पर महापौर ने सदन में बैठे अफसरों से कहा- आइंदा कोई भी इमारत मेरी अनुमति के बिना सीज नहीं की जाए। शहर विधायक भंसाली और सूरसागर विधायक जोशी ने कहा कि इस तरह के आदेश देकर अफसरों पर दबाव बनाना उचित नहीं होगा। हर काम इसी तरह पूछकर करने की परंपरा का कुछ साल बाद क्या असर होगा, इस पर भी महापौर को विचार करना चाहिए। ताकि उसके दुष्परिणाम सामने आने से पहले वस्तुस्थिति को समझ लिया जाए।


