होली के रंगों से पहले भक्ति और संगीत की बयार बहने लगी है। गोविंददेवजी मंदिर में फागोत्सव की शुरुआत हो गई है, जो एक महीने तक चलेगा। इस परंपरा के अनुसार होली से ठीक एक माह पहले डांडा पूजन किया जाता है, जिससे होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत होती है। माघ पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को मंदिर में वेद मंत्रोच्चार के साथ होली के डांडे का पूजन हुआ। महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में सेवाधिकारी मानस गोस्वामी, शुक संप्रदायाचार्य अलबेली माधुरी शरण, श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया, ज्योतिषाचार्य विनोद शास्त्री, परकोटा गणेश मंदिर के अमित शर्मा, अभिषेक जोशी पंचांग कर्ता जोधपुर सहित कई संत-महंतों ने प्रथम पूज्य गणपति और भक्त प्रहलाद का पूजन किया। इस दौरान श्री गौड़ विप्र लोकगीत मंडल के कलाकारों ने चंग-ढप पर होली के गीत गाकर माहौल को फाल्गुनी बना दिया। मंदिर की ओर से सभी संतों-महंतों को दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया। 13 मार्च को होलिका दहन, 14 मार्च को होली इस साल 13 मार्च को होलिका दहन और 14 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा। पहले खजाने वालों के रास्ते बद्रीनाथ जी के चौक में पच्चीस साल तक होली का डांडा पूजन होता था, लेकिन बाजारों में बढ़ती भीड़ और यातायात के दबाव के कारण पिछले तीन साल से यह पूजन गोविंददेवजी मंदिर के बाहर किया जा रहा है। मान्यता के अनुसार डांडा पूजन होते ही मांगलिक कार्य रुक जाते हैं, और मंदिरों में फाग महोत्सव शुरू हो जाता है, जो पूरे एक महीने तक चलेगा।


