जबलपुर नगर निगम की शैक्षणिक उपयोग के लिए दी गई लीज भूमि के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने जॉय एजुकेशन सोसायटी के तत्कालीन चेयरमैन अखिलेश मेवन और तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में नगर निगम को करीब 3.50 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति होना सामने आया है। साल 2000 में दी गई थी लीज EOW जांच के अनुसार, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशों के तहत नगर निगम जबलपुर ने प्लॉट नंबर-440, डाइवर्जन शीट नंबर-152, कुल 7500 वर्गफुट भूमि को शैक्षणिक कार्य के लिए 30 वर्ष की लीज पर जॉय एजुकेशन सोसायटी को आवंटित किया था। लीज की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि भूमि का उपयोग केवल शिक्षा के लिए किया जाएगा। 2020 में समाप्त हुई लीज शैक्षणिक उपयोग के लिए दी गई यह लीज वर्ष 2020 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद सोसायटी की ओर से आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिस पर 22 अप्रैल 2022 को पुनः 30 वर्ष के लिए लीज अवधि बढ़ाई गई। अनुमति के बिना अस्पताल निर्माण जांच में यह तथ्य सामने आया कि लीज नवीनीकरण के बाद नगर निगम की अनुमति के बिना भूमि पर अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। जबकि लीज दस्तावेज में स्पष्ट था कि शैक्षणिक उपयोग के अलावा किसी अन्य गतिविधि के लिए निगम की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। तहसीलदार के साथ मिल कर की साजिश EOW जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे के साथ कथित साजिश कर लीज भूमि को अवैध रूप से अपने नाम दर्ज करवा लिया गया, जबकि इसके लिए कोई वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। 3.5 करोड़ की सरकारी संपत्ति को नुकसान यह भूमि जबलपुर शहर के महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित है। कलेक्टर गाइड लाइन के अनुसार इसकी वर्तमान कीमत करीब 3.50 करोड़ रुपए आंकी गई है। जांच में शासन को इतनी ही आर्थिक क्षति पहुंचना प्रमाणित हुआ है। इन धाराओं में मामला दर्ज कर जांच हुई शुरू EOW ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(5), 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7(सी) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।


