भास्कर न्यूज| चाईबासा चाईबासा बल्ड बैंक में जिले के पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले में सदर थाना में लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार को नामजद अभियुक्त बनाकर केस दर्ज की है। लगभग चार महीने बाद सदर थाना मे केस दर्ज हुआ है। यह तब हुआ जब झारखंड हाईकोर्ट सख्त होकर एफआईआर करने का आदेश दिया। वहीं इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के जज गौतम कुमार चौधरी ने आदेश किया है कि पूरे रिपोर्ट के साथ सदर थानेदार को कोर्ट में हलफनामा व जांच रिपोर्ट के साथ पेश होना होगा। विदित हो कि संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में हाईकोर्ट में पीड़ित परिजनों ने पीआईएल दर्ज किया था। जिसकी अगली तारीख 18 फरवरी है। संक्रमित पांच नाबालिग बच्चे आदिवासी परिवारोें से है। इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि संक्रमित रक्त ”ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940” की धारा 3(b) के तहत आता है और मिलावटी व नकली दवाओं का उपयोग एक संज्ञेय अपराध है। बहरहाल इस मामले में सदर थाना में केस दर्ज होने के बाद बीएनएस की धारा 125,271,272,27 ए लगाया गया है। ये धारायें जल्दबाजी में दूसरों के जीवन को खतरे में डालना,लापरवाही से जीवन मंें खतरनाक बीमारी फैलाने के अलावे जानबुझकर खतरनाक बीमारी फैलाने जैसे आरोप लगे हैं। केस के अनुसंधानकर्ता दारोगा पंकज चौधरी बनाये गए हैं। पीड़ित बच्चों में से एक पिता ने केस दर्ज किया है। उसने लिखा है कि उनकी सात वर्षीय पुत्री जो कि बचपन से ही थैलीसीमिया बीमारी से पीड़ित है, उसके शरीर में खून नहीं बनता है और बुखार आने पर उसे सदर अस्पताल, चाईबासा स्थित ब्लड बैंक से वर्ष 2019 से ही खून चढ़वाना पड़ता है। मेरी पत्नी अकसर मेरी बेटी को लेकर सदर अस्पताल, चाईबासा जाती थी। अगस्त 2025 में मेरी बच्ची को काफी जल्दी- जल्दी बुखार आने लगा तो मेरी पत्नी अपनी बेटी को लेकर सदर अस्पताल डक्टर को दिखाई तो मुझे बहुत सारा टेस्ट करवाने बोले मेरी पत्नी मेरी बेटी का सदर अस्पताल स्थित एचआईवी जांच केन्द में जांच करवाने पर जांच रिपोर्ट में आया कि मेरी पुत्री एचआईवी संक्रमित हो गई है। संक्रमण का कारण है कि मेरी पुत्री को सदर अस्पताल, चाईबासा ब्लड बैंक के द्वारा एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। ब्लड बैंक में खून जांच करने और देने का काम टुंगरी निवासी मनोज कुमार का है। मुझे बाद में पता चला कि मेरी पुत्री के अलावा अन्य 04 बच्चों को भी एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया है। मेरी पुत्री को एचआईवी संक्रमण का मामला आने के बाद सामाजिक रूप से जीवन कष्टमय हो गया है। इस मामले में कार्य में लापरवाही ना बरती गई होती तो हमारे बच्चे एचआईवी संक्रमित नहीं हुए होते । इस मामले पर लापरवाह कर्मचारी के ऊपर कानूनी रूप से प्राथमिकी दर्ज करने की कृपा की जाए। पीड़ित : पांच नाबालिग बच्चे, जो गरीब और हाशिए के समाज से आते हैं। आरोप: चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक की लापरवाही के कारण रक्त चढ़ाए जाने के बाद बच्चे एचआईवी संक्रमित हो गए। कानूनी तर्क: याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि संक्रमित रक्त ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940′ की धारा 3(b) के तहत आता है और मिलावटी, नकली दवाओं का उपयोग एक संज्ञेय अपराध है। झारखंड हाईकोर्ट याचिकाकर्ता ने बताया कि इस मामले में पहले भी पुलिस को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि पुलिस को ऐसी कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अदालत ने पाया था कि याचिका के साथ संलग्न शिकायत पत्र पर कोई तारीख अंकित नहीं थी। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई शिकायत संज्ञेय अपराधका खुलासा करती है, तो एफआईआर दर्ज करना पुलिस का वैधानिक कर्तव्य है। इसके बाद पीड़ितों के अभिभावक संबंधित थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराया है। केस दर्ज होने के बाद संबंधित थाना प्रभारी को जवाबी हलफनामा दायर कर एफआईआर की कॉपी कोर्ट में पेश करने का निर्देश है


