बैतूल के चिचोली नगर स्थित श्री तपश्री स्टेडियम में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती के अवसर पर श्रद्धानंद आर्य समाज द्वारा भव्य 51 कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया। इस वैदिक महायज्ञ में 205 यजमानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी। यज्ञ की विधि आर्य विद्वान आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने संपन्न करवाई। उन्होंने यज्ञ के वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए बताया कि सृष्टि में पुरुष अग्नि का और स्त्री सौम्यता का प्रतीक है। यज्ञ में पुरुष द्वारा अग्नि और स्त्री द्वारा जल अर्पण जीवन में संतुलन का प्रतीक है। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। आचार्य याज्ञिक ने महर्षि दयानंद की 150 वर्ष पुरानी चेतावनी को याद करते हुए कहा कि शुद्ध अन्न, जल और वायु के बिना जीवन संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने लोगों से जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और पूर्वजों की स्मृति में वृक्षारोपण करने का आह्वान किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को लक्ष्मी तरु के पौधे वितरित किए गए। कार्यक्रम में आर्य समाज के प्रधान रोहित आर्य, मंत्री क्रांति आर्य, कोषाध्यक्ष सुरेश राठौर उपस्थित रहे। महिला आर्य समाज की प्रधान प्रमिला आर्य, मंत्री रोशनी आर्य और अन्य महिला सदस्यों का भी विशेष योगदान रहा।


