जागो-जागो रे बिश्नोई भाइयों, खेजड़ली है संकट में… यह बोल उस गीत के हैं, जो खेजड़ी को लेकर गाए जा रहे हैं। खेजड़ी को बचाने के लिए चल रहा आंदोलन इन दिनों भक्ति का केंद्र बना हुआ है। संतों के सानिध्य में पूरे दिन भजन-कीर्तन चल रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रदेश और देशभर में बिश्नोई समाज के लोगों से महापड़ाव में पहुंचने की अपील की जा रही है। आंदोलन के तहत बिश्नोई धर्मशाला के सामने महापड़ाव छठे दिन भी जारी रहा। पूर्व घोषणा के अनुसार शनिवार को 51 पर्यावरण प्रेमी क्रमिक अनशन पर बैठे। फलौदी के आउ गांव में शनिवार को हुई खेजड़ी कटने की घटना पर लोगों ने आक्रोश जताया। संत सच्चिदानंद, भागीरथ शास्त्री, आनंद प्रकाश ने कहा कि जब सरकार के मंत्री ने दो संभागों में खेजड़ी की कटाई पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है तो इस अपराध को क्यों नहीं रोका जा रहा है। आंदोलन के संयोजक परसराम बिश्नोई ने बताया कि रविवार को भी 51 लोग भूख हड़ताल पर बैठेंगे। कांग्रेस का पैदल मार्च
पूर्व कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला अपने कार्यकर्ताओं के साथ महापड़ाव तक पैदल मार्च कर पहुंचे। उन्होंने खेजड़ी के महत्व को उजागर करते हुए मांग रखी कि सरकार को यथाशीघ्र ट्री प्रोटेक्शन एक्ट बनाकर खेजड़ी की कटाई पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि सोलर पश्चिमी राजस्थान में प्रकृति के विनाश का एक बहुत बड़ा कारण बनेगा। पर्यावरण संघर्ष समिति के संयोजक रामगोपाल बिश्नोई ने बताया कि पूर्व विधायक गिरधारी महिया, सीपीएम, आम आदमी पार्टी, साइका समाज सहित कई समाजों के प्रतिनिधियों ने महापड़ाव में पहुंचकर आंदोलन का समर्थन दिया है। संभाग के श्रीगंगानगर सहित विभिन्न जिलों से भी पर्यावरण प्रेमी पहुंचे।


