राज्य पशु ऊंट की घटती संख्या को थामने राज्य सरकार ने ऊंट संरक्षण और विकास मिशन बनाया है। मिशन के तहत ऊंटपालकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ साथ ऊंट संरक्षण के लिए प्रयास किए जाएंगे। प्रदेश में भाजपा सरकार के एक साल पूरा होने पर मिशन के तहत पशुपालन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी गांव–गांव जाकर ऊंटपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाएंगे। साथ ही ऊंट संरक्षण के लिए दी जा रही प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन पत्र भरवाएंगे। ऊंटों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के भी प्रयास किए जाएंगे। इससे ऊंटपालकों की आमदनी में बढ़ाेतरी की जाएगी। इसी साल से सरकार ने प्रत्येक तोडिया के जन्म पर दी जाने वाली दस हजार की प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर बीस हजार कर दी है। 100 ऊंटपालकों के खाते में पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। तोडिया के जन्म के एक साल बाद इस राशि के लिए आवेदन किए जाने का प्रावधान है। दो किस्तों में बीस हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। ऊंटपालकों को इसके लिए आधार और जन आधार के साथ ई मित्र पर आवेदन करना होता है। ऊंट संरक्षण और विकास मिशन कार्यक्रम में अलग से अधिकारी व कर्मचारियों के पद स्वीकृत किए गए हैं। ये अधिकारी और कर्मचारी उनसे संपर्क कर योजनाओं की जानकारी देंगे। साथ ही प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन की प्रक्रिया समझाएंगे। सबसे ज्यादा जैसलमेर में 50 हजार वर्ष 2012 में पशुगणना में प्रदेश में 325713 ऊंट थे। जबकि वर्ष 2019 की पशु गणना में घट कर 212739 ऊंट रह गए। सिरोही, पाली, जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, बीकानेर, सीकर, चूरू, झुंझुनूं, श्री गंगानगर, हनुमानगढ़ सहित कई जिलों में बहुतायत में ऊंट हुआ करते थे। चरागाह में कमी से ऊंटों की संख्या में कमी आने लगी। जैसलमेर में सबसे ज्यादा करीब 50 हजार ऊंट हैं जबकि डूंगरपुर में सिर्फ 38 ही ऊंट रह गए हैं। प्रोत्साहन की राशि लेने में भीलवाड़ा अव्वल, चूरू–हनुमानगढ़ सबसे कम तोडिया के जन्म के एक साल बाद आवेदन करने वालों में भीलवाड़ा के किसान पशुपालक सबसे आगे रहे हैं। भीलवाड़ा के 140 तोडियों के लिए 10–10 हजार रुपए की पहली किस्त दी गई है। इसके बाद सर्वाधिक लाभान्वित जयपुर जिले के 80 हैं। जबकि चूरू और हनुमानगढ़ में सिर्फ एक–एक ऊंटपालकों को प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसी तरह बीकानेर के 9, अलवार के 38, उदयपुर के 19, झुंझुनूं के 10, सिरोही के 56, कुचामन के 9, रामसमंद के 5, कोटा के 10 व बूंदी के 35 तोडियों की संरक्षण राशि दी गई है। वहीं, सबसे ज्यादा ऊंट वाले जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर, जोधपुर, पाली आदि जिलों के किसी ऊंटपालक का नाम नहीं है। इसकी मुख्य वजह है अधिकांश ऊंटपालक आवेदन नहीं कर पाए या जानकारी ही नहीं होगी।


