अनशन पर बैठी सास-बहु की तबियत बिगड़ी:60 साल की रतनी देवी बोलीं- ‘जान की परवाह नहीं, सरकार कानून बनाए’

राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए शुरू हुआ आंदोलन अब और भी गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पर्यावरण प्रेमी स्वर्गीय राधेश्याम पेमाणी (विश्नोई) की माता और पत्नी, जो पिछले तीन दिनों से अनशन पर थीं, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा है। राधेश्याम की मां रतनी देवी को जैसलमेर के प्रिया हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है, जबकि पत्नी निरमा विश्नोई को पोकरण में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दी गई। संतों के आह्वान पर तोड़ा था अनशन, पर शरीर ने नहीं दिया साथ बीते मंगलवार, 3 फरवरी से दोनों महिलाएं खेजड़ी बचाओ आंदोलन के समर्थन में अन्न-जल त्याग कर बैठी थीं। हालांकि, संतों के हस्तक्षेप और आंदोलन को आगे बढ़ाने के रणनीतिक निर्णय के बाद उन्होंने अनशन समाप्त तो किया, लेकिन अचानक खान-पान शुरू करने से उनकी सेहत बिगड़ गई। प्रिया हॉस्पिटल की डॉ. राजेश्वरी धनदेव ने बताया, “लगातार तीन दिनों तक भूखे रहने के कारण रतनी देवी की आंतों में ऐंठन और सूजन आ गई है। इस वजह से उन्हें उल्टियां हो रही हैं और कमजोरी बहुत अधिक है। फिलहाल हम उन्हें ग्लूकोज और लिक्विड डाइट पर रख रहे हैं और उनकी स्थिति की निरंतर निगरानी की जा रही है।” ‘जान की परवाह नहीं, सरकार कानून बनाए’ हॉस्पिटल के बेड पर लेटे हुए भी रतनी देवी के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “हमें अपनी जान की परवाह नहीं है। मेरे बेटे राधेश्याम ने वन्यजीवों को बचाते हुए अपनी जान दे दी, अगर हमें भी बलिदान देना पड़े तो गम नहीं। हमारी बस एक ही मांग है कि सरकार खेजड़ी को बचाने के लिए सख्त कानून बनाए। जब तक पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” विरासत में मिला है पर्यावरण प्रेम गौरतलब है कि स्वर्गीय राधेश्याम विश्नोई पर्यावरण और वन्यजीव प्रेम के प्रतीक रहे हैं। सड़क हादसे में उनकी मृत्यु भी वन्यजीवों की रक्षा के प्रयास के दौरान ही हुई थी। अब उनका परिवार उसी मशाल को आगे लेकर चल रहा है। समाज और पर्यावरण प्रेमियों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश है और सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की जा रही है। मुख्य मांगें: खेजड़ी की कटाई को रोकने के लिए विशेष कानून। वन्यजीव तस्करों और पेड़ों की अवैध कटाई करने वालों पर सख्त कार्रवाई। शहीद राधेश्याम विश्नोई के परिवार की मांगों पर त्वरित अमल। ये खबर भी पढ़ें….
खेजड़ी बचाने के लिए सास-बहू ने खाना-पानी छोड़ा:दो दिन से कुछ नहीं खाया; मां बोलीं-पेड़ों को बचाने बेटा सबसे आगे रहता था
बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब पश्चिमी राजस्थान के घरों तक पहुंच गया है। जैसलमेर के एक परिवार में सास-बहू ने खेजड़ी बचाने के लिए खाना-पानी छोड़ दिया है। जिले के लाठी गांव में पर्यावरण प्रेमी राधेश्याम की 23 मई 2025 को मौत हो गई थी। बेटा नहीं रहा तो उनकी मां रतनी देवी और पत्नी निरमा विश्नोई दोनों ने घर पर अनशन शुरू कर दिया है। मां बोलीं- जहां भी हिरणों के शिकार और पेड़ों की कटाई की बात आती, मेरा बेटा राधेश्याम सबसे आगे रहता था। अब वह दुनिया में नहीं है तो उसके अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए बहू के साथ अनशन पर बैठी हूं। (खबर पढ़ें)

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