सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में एक बार फिर 17 साल 7 महीने की मशहूर ‘लंगड़ी बाघिन’ PN-20 (टी-20) नजर आई है। कर्माझिरी रेंज के पर्यटन क्षेत्र में बाघिन नाला तालाब के पास उसकी मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को उत्साहित कर दिया। PN-20 पेंच की सबसे उम्रदराज और चर्चित बाघिनों में गिनी जाती है। 10 शावकों को दे चुकी है जन्म PN-20 का प्रजनन इतिहास पेंच के लिए बेहद अहम रहा है। उसने अलग-अलग वर्षों में कुल 10 शावकों को जन्म दिया। वर्ष 2021 में जन्मी मादा शावक PN-165 ‘लक्ष्मी’ आज भी कर्माझिरी क्षेत्र में सक्रिय है। बाघिन शारीरिक रूप से कमजोर अत्यधिक आयु के कारण अब यह बाघिन शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी है और स्वयं शिकार करने में असमर्थ है। वन विभाग के अनुसार, उसे अन्य बाघों या तेंदुओं द्वारा छोड़े गए शिकार और छोटे वन्य प्राणियों से समय-समय पर भोजन मिल जाता है। पी.एन. 20 पेंच टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता और सफल बाघ संरक्षण प्रयासों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। PN-20 का जन्म साल 2008 में हुआ था। वह विश्व प्रसिद्ध ‘कॉलरवाली’ बाघिन की बहन है। अपने सक्रिय दौर में इस बाघिन ने कर्माझिरी परिक्षेत्र के करीब 70% इलाके में अपना दबदबा बनाए रखा। आगे के पंजे में दिक्कत के कारण उसकी चाल अलग रही, इसी वजह से वह ‘लंगड़ी बाघिन’ के नाम से जानी गई। बावजूद इसके, जंगल में उसकी पहचान और प्रभुत्व कभी कम नहीं हुआ।


