बीकानेर में खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए चल रहे आंदोलन ने अब तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने इस पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने साफ कहा कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की पहचान और बिश्नोई समाज की आस्था से जुड़ा विषय है। मंत्री चौधरी ने आंदोलन के पीछे के राजनीतिक कारणों पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि राजनीति में अक्सर कुछ लोग शांति होने पर भी ‘चिंगारी’ लगाने की कोशिश करते हैं। उनका इशारा साफ था कि इस आंदोलन को राजनीतिक हवा देने की कोशिश की जा रही है, जबकि सरकार समाधान की दिशा में काम कर रही है।
केन्द्र सरकार के बजट के बाद उदयपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भागीरथ चौधरी ने कहा कि राजस्थान सरकार इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से देख रही है। सरकार कभी नहीं चाहती कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो, खासकर खेजड़ी जैसे पवित्र और उपयोगी वृक्ष की। उन्होंने बिश्नोई समाज के त्याग को याद करते हुए कहा कि इस समाज ने पेड़ों को बचाने के लिए पहले भी कई बड़ी कुर्बानियां दी हैं। उनका इतिहास पर्यावरण संरक्षण की मिसाल है। सरकार अब इस कोशिश में है कि इस समस्या का कोई उचित समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए।
खेजड़ी विवाद के अलावा चौधरी ने कृषि और अर्थव्यवस्था पर भी बात की। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। इस दौरान उन्होंने ‘जीरामजी’ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके जरिए 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इसमें काम करने वालों को पूरे दाम मिलेंगे। फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
भागीरथ चौधरी ने नरेगा का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले नरेगा के कामों में कई तरह के फर्जीवाड़े की खबरें आती थीं, लेकिन नई व्यवस्था से इसे रोका जा सकेगा। उन्होंने जीरामजी को किसान, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों के लिए एक बड़ा मददगार बताया। मंत्री के अनुसार, यह अध्यादेश देश की प्रगति में एक मील का पत्थर साबित होगा और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।


