शहर में संचालित चार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पांच सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का लाइव डेटा निगम मुख्यालय में जल्द दिखाई देगा। निगम मुख्यालय की तीसरी मंजिल पर पीएचई यूनिट में स्काड़ा कंट्रोल रूम बनकर तैयार हो गया है। अब यहां पर ट्रायल शुरू हो गई है। कंट्रोल रूम में लगी स्क्रीन पर फिलहाल 5सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की डेटा सामने आने लगा है। एक-दो दिन में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का भी डेटा स्क्रीन पर दिखने लगेगा। निगम ने लाल टिपारा पर 65 एमएलडी, जलालपुर में 145 एमएलडी, शताब्दीपुरम 8 एमएलडी और ललियापुरा में 4 एमएलडी का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट है। एक प्लांट बैजाताल के पास है। यहां पर रोज सीवर का पानी ट्रीट करने के कई टेस्ट लगाए जाते है। उनकी रिपोर्ट को स्काड़ा के माध्यम से अफसर अपने मोबाइल और निगम मुख्यालय पर देख सकेंगे। इसी प्रकार की वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की रिपोर्ट भी जल्द ही अधिकारियों के मोबाइल और कंट्रोल रूम में दिखेगी। अभी सीवर ट्रीट करने के बाद पीएच वैल्यू, सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड), बीओडी (बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड), टीएसएस (टोटल सस्पेंडेट सॉलिड टेस्ट) की रिपोर्ट दिख रही है। इन 4 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से होती है पेयजल सप्लाई जलालपुर स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 160 एमएडी, तिघरा स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 52, मोतीझील ओल्ड प्लांट 68 एमएलडी और मोतीझील न्यू प्लांट 68 एमएलडी का है। यह होगा फायदा: अभी तक तिघरा से आने वाले पानी के विभिन्न टेस्ट की रिपोर्ट प्लांट तक ही सीमित रह जाती थी। अब स्काड़ा के माध्यम से निगम मुख्यालय में ऑनलाइन देखी जा सकेगी। जिससे अधिकारियों को पता होगा किस वाटर ट्रीटमेंट से कितना शुद्ध पानी की सप्लाई हो रही है। इससे लोगों की गंदे पानी की समस्या दूर होगी।


