विकास कार्यों में देरी पर गहलोत ने लिखा पत्र:कहा – दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में जोधपुर की परियोजनाओं को गति दे सरकार

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर जोधपुर शहर की ऐतिहासिक विरासत, बुनियादी ढांचे और लंबित विकास परियोजनाओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। गहलोत ने कहा है कि सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित में इन परियोजनाओं को गति दे और आगामी बजट में उचित प्रावधान करे। सीवरेज और ऐतिहासिक तालाबों की उपेक्षा गहलोत ने पत्र में बताया कि जोधपुर की सीवरेज व्यवस्था के सुधार के लिए बनाई गई 300 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण योजना वर्तमान में जांच के नाम पर लंबित है. इसके कारण शहर में जलभराव और गंदगी की समस्या गंभीर हो गई है। साथ ही, उन्होंने रानीसर, पदमसर, गुलाबसागर और फतेहसागर जैसे ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण हेतु पूर्व स्वीकृत राशि को तुरंत जारी करने की मांग की है। अधूरे स्पोर्ट्स प्रोजेक्ट्स और लाइब्रेरी पूर्व मुख्यमंत्री ने युवाओं से जुड़ी परियोजनाओं के प्रति सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि स्टेट स्पोर्ट्स आवासीय सेंटर लगभग 100 करोड़ की लागत से बना है, यह केंद्र तैयार है, लेकिन 3.8 करोड़ की बचत राशि की फाइल लंबित होने के कारण स्वीमिंग पूल और इंडोर हॉल का काम अधूरा है। गहलोत ने पत्र में लिखा कि नवनिर्मित हॉस्टल्स का हैंडओवर न होने के कारण खिलाड़ी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं। सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी का नया भवन तैयार है, लेकिन बजट और स्टाफ के अभाव में इसका संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। चिकित्सा सेवाओं में गिरावट पत्र में जोधपुर की स्वास्थ्य सेवाओं की ब का भी जिक्र किया गया है। उन्होंने लिखा कि एमडीएम अस्पताल के लगभग 81 करोड़ रुपये की देनदारी के कारण वेंडर्स ने जरूरी उपकरण की आपूर्ति बंद कर दी है। वहीं, मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी जो कि 500 करोड़ की परियोजना है। इसका निर्माण कार्य अत्यंत धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने ने कहा कि मंडोर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड और प्रताप नगर जैसे जिला अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली हैं और उपकरणों की कमी बनी हुई है। सड़कों और अन्य विकास कार्यों की मांग गहलोत ने जोधपुर की बदहाल सड़कों और जल वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए विशेष पैकेज आवंटित करने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि चैनपुरा स्टेडियम, राजकीय आयुर्वेद नर्सिंग सेंटर का ऑडिटोरियम और सूचना केंद्र का मिनी ऑडिटोरियम जैसे कार्य पूर्ण होने के बावजूद आमजन के लिए नहीं खोले गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से कहा कि विकास कार्यों को किसी सरकार की पहचान के बजाय जनता के हक के रूप में देखा जाना चाहिए और इन सभी परियोजनाओं का तत्काल उद्घाटन कर जनसेवा में समर्पित किया जाना चाहिए।

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