श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और महारास का प्रसंग सुनाया

बाजवा नगर स्थित वेद निकेतन धाम में भक्ति, शक्ति और प्रेम की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है। अनंत विभूति 1008 महामंडलेश्वर स्वामी वेद भारती महाराज के दिव्य सान्निध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन रविवार को कथा व्यास रविनंदन शास्त्री ने अपनी अमृतमयी वाणी से श्रद्धालुओं को प्रभु भक्ति के रस में सराबोर कर दिया। कथा व्यास रविनंदन शास्त्री ने जीवन में प्रेम की महत्ता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ईश्वर केवल कर्मकांड या दिखावे की भक्ति से प्रसन्न नहीं होते। कहा कि प्रेम की पुकार ही वह एकमात्र मार्ग है जो भक्त का भगवान से साक्षात्कार करवा सकती है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और महारास का प्रसंग सुनाया। शास्त्री ने बताया कि जब हजारों गोपियां भगवान के दर्शन के लिए व्याकुल थीं, तब प्रभु ने अपनी अलौकिक लीला रची। उन्होंने एक साथ हजारों रूप धारण कर प्रत्येक गोपी को उनके अपने माधव के साथ होने का साक्षात् आभास कराया। कार्यक्रम का शुभारंभ पुरुषोत्तम दास गुप्ता और आदित्य गुप्ता द्वारा ज्योति प्रज्वलित कर किया गया, जबकि पार्षद अमन बग्गा ने ध्वजारोहण की रस्म अदा की। इस अवसर पर टोनी, सीमा मग्गो, गुरुदत्त, कमला चौहान, राज कुमार, सुधा खुराना सहित शहर के गणमान्य परिवारों ने सनातन धर्म का ध्वज फहराया। गुरु गद्दी का पूजन बलदेव और गुलशन दुआ ने किया। स्वामी प्रिया भारती, स्वामी अमिता भारती और स्वामी चैतन्य भारती सहित अन्य संतों ने व्यास पीठ की वंदना करते हुए कहा कि श्रद्धा भाव से सुनी गई कथा ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

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