रुकेगा फर्जीवाड़ा:अब सरकारी पेयजल टैंकरों पर पैनी निगरानी, एआई और जीपीएस के साथ होगा पानी का ट्रैकिंग सिस्टम

प्रदेश में अब सरकारी पेयजल टैंकरों की मॉनिटरिंग जीपीएस के साथ ही एआई सिस्टम से की जाएगी। ताकि ठेकेदार टैंकरों से पेयजल सप्लाई में फर्जीवाड़ा नहीं कर सके। इसके लिए विभाग में एआई मोबाइल एप्लीकेशन और पीएलसी एंड स्काड़ा सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर टैंकरों से पेयजल सप्लाई को पारदर्शी व कुशल बना रहा है। पूरी प्रक्रिया का डिजिटल कंट्रोल व रियल टाइम ट्रेकिंग हो सकेगी। जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोडा की पहल पर विभाग ने इसके लिए प्लानिंग की है। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह नई प्रणाली टैंकरों से पानी की सप्लाई को जनता तक सुनिश्चित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाएगी। टैंकर घोटाले को रोकने के लिए पड़ी जरूरत हर साल 100 करोड़ रुपए से ज्यादा बजट टैंकरों से पेयजल सप्लाई पर ही खर्च हो जाता है, लेकिन कई ठेकेदार व इंजीनियर इन पानी के टैंकरों को आम जनता से पहुंचाने के बजाए होटलों, रेस्टोरेंट, फैक्ट्रियों, आरओ प्लांट व ढाबों पर
बेच देते है। वहीं पानी के टैंकर जरूरतमंद तक जाने के बजाए दूसरे लोगों को बेच देते है। अभी ऐसे होता है वेरिफिकेशन पानी की टंकियों पर हाइड्रेंट स्थल पर एआई आधारित ओसीआर से युक्त कैमरों का उपयोग करके टैंकरों का प्रमाणीकरण किया जाता है, जो पीएचईडी द्वारा अधिकृत डेटाबेस के विरुद्ध वाहन पंजीकरण को पढ़कर उनका सत्यापन करते हैं। सत्यापन के बाद, चालक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके हाइड्रेंट के नीचे स्थित टैंकर की लाइव तस्वीर अपलोड करता है। अब यह भी होगा प्रोसेस अब लाइव सीसीटीवी फीड और ऑपरेशनल डेटा केंद्रीकृत डेशबोर्ड पर उपलब्ध होगा। इससे दूसरी जगह से भी टैंकर की मॉनिटरिंग की जा सकेगी। इस सिस्टम से टैंकरों की रीयल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग किया जाना संभव हो सकेगा। ठेकेदार टैंकरों, ड्राइवरों, इन्वेंट्री और हार्डवेयर की स्थिति के साथ-साथ ट्रिप की पुष्टि, ई-लॉगबुक और स्वचालित बिल जनरेशन कर सकते हैं।

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