क्षेत्र के गांव नगला पंछादरा निवासी समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी गिरधारी लाल का जीवन आज निस्वार्थ सेवा और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन चुका है। जब अधिकतर लोग अपने लिए सुविधाएं जुटाने में लगे रहते हैं, तब गिरधारी लाल ने प्रकृति की सेवा को अपना धर्म मान लिया। गुरु की प्रेरणा से शुरू हुआ यह सफर अब 37 वर्षों का हो चुका है, जिसमें वे करीब 15 हजार से अधिक वृक्ष लगा चुके हैं। गिरधारी लाल की खास बात यह है कि वे वृक्षारोपण के लिए किसी सहायता या अनुदान का इंतजार नहीं करते। पौधे खरीदने से लेकर उन्हें लगाने और वर्षों तक देखभाल करने तक का पूरा खर्च वे स्वयं उठाते हैं। सड़क किनारे, स्कूल परिसर, सार्वजनिक स्थान, श्मशान भूमि और खाली जमीन—हर जगह उन्होंने हरियाली फैलाने का कार्य किया है।
उनका समर्पण इतना गहरा है कि जीवन यापन के लिए मिलने वाली मात्र 750 रुपये की मासिक पेंशन भी वे पौधरोपण जैसे पुनीत कार्य में लगा देते हैं। करीब 80 वर्ष की उम्र में भी उनका हौसला किसी युवा से कम नहीं है। निजी नर्सरी से मुफ्त पौधों का वितरण, लोगों को जागरुक भी कर रहे हरियाली बढ़ाने के लिए उन्होंने विनायक नगर के पास चंबल प्लांट परिसर में अपनी निजी नर्सरी विकसित की है। यहां से वे लोगों को निशुल्क पौधे वितरित करते हैं, ताकि आर्थिक कारणों से कोई भी वृक्षारोपण से वंचित न रहे। नर्सरी के माध्यम से वे बच्चों और युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। गिरधारी लाल को जिला व उपखण्ड स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन उनके लिए असली पुरस्कार वह हरियाली है, जो उनके लगाए वृक्षों के रूप में आज क्षेत्र को मिल रही है। उनका सपना है कि हर व्यक्ति कम से कम एक वृक्ष जरूर लगाए और उसकी देखभाल करे। बिना अनुदान, अपने खर्च पर हरियाली अभियान चलाया गिरधारी लाल की पहचान यही है कि वे किसी सहयोग का इंतजार नहीं करते। कोई गांव, संस्था या व्यक्ति यदि पेड़ लगाने की बात करता है, तो वे अपने खर्च पर पौधे लेकर वहां पहुंच जाते हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ एक है—धरती को हरा-भरा बनाना।


