संसार वाले तो मित्रता की आड़ में कांटे चुभाते हैं, लेकिन कांटे निकालने का काम तो भगवान गोविंद ही करते हैं

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा वर्तमान में सच्चे मित्र मिलना दुर्लभ है। जग में मित्रता हो तो कृष्ण-सुदामा जैसी। सुदामा के चरणों का कांटा भगवान ने अपने मुख से निकाला। वर्तमान युग में ऐसा कौन है, जो मित्र के दुःख को बांटने के लिए अपने सुख छोड़ दे। संसार वाले तो मित्रता की आड़ में कांटे चुभाते हैं, लेकिन कांटे निकालने का काम भगवान गोविंद करते हैं। मित्र उसी को बनाना चाहिए जिसका मन पवित्र हो। दरिद्र वही है जिसके पास भगवान रूपी धन नहीं हैं। कृष्ण जैसा मित्र जिसके पास हो वह सुदामा कभी दरिद्र नहीं हो सकता। यह बात अग्रवाल उत्सव भवन में रविवार को गीतादेवी तोषनीवाल चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के अंतिम दिन व्यासपीठ से कथावाचन करते हुए रामस्नेही संत दिग्विजयराम महाराज ने कही। सातवें दिन सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वाचन किया। कृष्ण सुदामा की झांकी सजाई गई। कथा के साथ शुरू सात दिवसीय महामंगलकारी पंच कुंडीय श्री विष्णु महायज्ञ की पूर्णाहुति भी हुई। शनिवार रात कथा स्थल पर राष्ट्रीय संत डॉ. मिथिलेश नागर ने संगीतमय सुंदरकांड पाठ किया। कथा के दौरान भजनों पर नृत्य करती महिलाएं

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