चंडीगढ़ सेक्टर-22 में रक्षाबंधन के दिन 2 सगी बहनों की हत्या के मामले में अदालत आज सजा सुनाएगी। वर्ष 2019 में हुई इस दोहरे हत्याकांड में जीरकपुर निवासी कुलदीप सिंह को कोर्ट पहले ही दोषी ठहरा चुकी है। कुलदीप चंडीगढ़ पुलिस के एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर का बेटा है। उसने शादी से इनकार और प्यार पर शक के चलते मनप्रीत कौर की हत्या की, जबकि उसे बचाने आई उसकी बहन राजवंत कौर की भी जान चली गई। कोर्ट ने वीरवार को मामले में फैसला सुनाते हुए कुलदीप को दोषी करार दिया था। शादी से इनकार बना हत्या की वजह पुलिस जांच और कोर्ट में पेश सबूतों के मुताबिक, कुलदीप मनप्रीत कौर से शादी करना चाहता था। दोनों के बीच करीब 10 साल से जान-पहचान और दोस्ती थी, लेकिन कुछ समय से मनप्रीत उससे दूरी बनाने लगी थी। वह न फोन उठा रही थी और न ही मैसेज का जवाब दे रही थी। कुलदीप को शक था कि मनप्रीत का किसी और के साथ अफेयर है। इसी शक और गुस्से में उसने वारदात को अंजाम दिया। तड़के कमरे में घुसकर किया हमला 15 अगस्त 2019 की तड़के कुलदीप सेक्टर-22 स्थित पीजी के पिछले दरवाजे से कमरे में घुसा। उस समय दोनों बहनें सो रही थीं। कुलदीप ने मनप्रीत का मोबाइल चेक करना शुरू किया, तभी उसकी नींद खुल गई और वह चिल्लाने लगी। कमरे में रखी टूटी कैंची से कुलदीप ने मनप्रीत पर जानलेवा हमला कर दिया। शोर सुनकर राजवंत कौर जाग गई और उसने अपनी बहन को बचाने की कोशिश की। राजवंत मिन्नतें करती रही— “मेरी बहन को मत मारो”, लेकिन कुलदीप ने उस पर भी कैंची से ताबड़तोड़ वार कर दिए। दोनों बहनों की मौके पर ही मौत हो गई। आई-विटनेस बुजुर्ग महिला का बयान बना अहम सबूत मामले में 60 वर्षीय शशि का बयान बेहद अहम साबित हुआ। शशि उसी इमारत में रहती थीं और टिफिन सर्विस चलाती थीं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वह रोज तड़के 4-5 बजे उठ जाती थीं। घटना वाले दिन उन्होंने ऊपर से चीखने की आवाजें सुनीं और टॉप फ्लोर पर पहुंचीं। उन्होंने दरवाजे के अंदर से राजवंत की आवाज सुनी— “मेरी बहन को मत मारो”। तभी एक युवक ने उन्हें देख लिया और कहा— “यहां कुछ नहीं है, आप चली जाओ” और दरवाजा बंद कर दिया। कुछ देर बाद शशि ने खिड़की से देखा कि वही युवक पीठ पर बैग टांगे तेजी से भाग रहा था। रक्षाबंधन के दिन खुला राज घटना वाले दिन रक्षाबंधन था। दोनों बहनों का भाई लगातार उन्हें फोन करता रहा, लेकिन कोई कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद उसने मकान मालिक को सूचना दी। दोपहर करीब 2 बजे मकान मालिक मौके पर पहुंचा। बाहर से कमरे का दरवाजा बंद था। ताला तोड़कर अंदर देखा गया तो दोनों बहनों के शव खून से लथपथ पड़े थे। सीसीटीवी फुटेज से हुई पहचान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में तड़के 4:09 बजे एक युवक को कमरे में प्रवेश करते और करीब 10 मिनट बाद निकलते देखा गया। पड़ोस में रहने वाले एक नेपाली युवक ने फुटेज में युवक की पहचान कुलदीप के रूप में की। पुलिस ने अगले दिन कुलदीप को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने जुर्म कबूल करते हुए बताया था कि वह मनप्रीत से शादी करना चाहता था, लेकिन उसके इनकार के बाद उसने वारदात को अंजाम दिया।


