इग्नू ने रेगुलर के साथ डिस्टेन्स डिग्री का विकल्प खोला

भास्कर न्यूज | अंबिकापुर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) द्वारा सरगुजा संभाग में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर खोलने की पहल की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप अब विद्यार्थी अपनी रेगुलर पढ़ाई के साथ-साथ डिस्टेन्स मोड में डिग्री भी हासिल कर सकेंगे। इसी विषय को लेकर प्रतापपुर नाका स्थित होटल पंचानन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें इग्नू क्षेत्रीय केंद्र रायपुर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राजेन्द्र गौड़ा ने विस्तार से जानकारी साझा की। डॉ. गौड़ा ने कहा कि इग्नू देश की सबसे बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है, जो गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए जानी जाती है। वर्तमान में इग्नू के माध्यम से देशभर में 333 से अधिक स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और पीजी डिप्लोमा कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। अध्ययन केंद्र केआर टेक्निकल की समन्वयक डॉ रीनू जैन ने कहा कि इग्नू से कला, वाणिज्य, विज्ञान, प्रबंधन, शिक्षा, सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर एप्लीकेशन, पत्रकारिता, पर्यटन, स्वास्थ्य, योग, लाइब्रेरी साइंस सहित भागवत गीता, कई व्यावसायिक और कौशल आधारित पाठ्यक्रम शामिल हैं। सरगुजा संभाग के विद्यार्थियों के लिए यह विशेष अवसर है। संजय नगर में इग्नू का संभाग का एकमात्र अधिकृत अध्ययन व परीक्षा केंद्र केआर टेक्निकल है। जहां से विद्यार्थी प्रवेश, अध्ययन सामग्री, काउंसलिंग, असाइनमेंट और परीक्षा से जुड़ी सभी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी उच्च शिक्षा से जुड़ने में आसानी होगी। इस दौरान अध्ययन केंद्र की समन्वयक डॉ रीनू जैन, शासी निकाय के अध्यक्ष एकांत दुबे, उपाध्यक्ष राहुल जैन, केआर टेक्निकल के प्राचार्य डॉ रितेश वर्मा मौजूद रहे। नौकरीपेशा व स्टूडेंट्स के लिए इग्नू बेहतर विकल्प इग्नू के कोर्स खासतौर पर उन विद्यार्थियों, नौकरीपेशा युवाओं, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों, गृहिणियों और ऐसे लोगों के लिए उपयोगी हैं, जो किसी कारणवश नियमित कॉलेज नहीं जा सकते। इग्नू की डिग्रियां यूजीसी से मान्यता प्राप्त हैं और इन्हें सरकारी व निजी क्षेत्रों में समान रूप से स्वीकार किया जाता है। डॉ. गौड़ा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, क्रेडिट ट्रांसफर और फ्लेक्सिबल लर्निंग जैसे प्रावधानों से विद्यार्थियों को पढ़ाई के अधिक विकल्प मिल रहे हैं।

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