शिव डहरिया बोले- बीजेपी के लोग धर्म के ठेकेदार:पूर्व मंत्री ने कहा- 3 बड़े नेता क्यों नहीं गए कुंभ, अब दें जवाब

छत्तीसगढ़ के पूर्व कांग्रेस मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने सरकार के तीन मंत्रियों के कुंभ में शामिल न होने को लेकर कहा कि, बीजेपी नेताओं को छूट मिली हुई है। अगर वे किसी धार्मिक आयोजन में शामिल न हों तो कोई उन पर टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन अगर कांग्रेस का कोई नेता इसमें भाग न ले तो उस पर निशाना साधा जाता है। डहरिया ने कहा कि, बीजेपी के लोग धर्म के बड़े ठेकेदार बनते हैं, अब जवाब दें कि उनके तीन बड़े नेता कुंभ में क्यों नहीं गए? इनमें ओपी चौधरी और डिप्टी सीएम साहब शामिल हैं। इन पर भी टिप्पणी होनी चाहिए कि ये संस्थान विरोधी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, बीजेपी को अपनी ही पार्टी के भीतर फैले दोहरे मापदंडों पर विचार करना चाहिए। नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की जीत का दावा पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने नगरीय निकाय चुनाव को लेकर कहा कि कांग्रेस की स्थिति इन चुनावों में मजबूत है और पार्टी को कई स्थानों पर जीत मिलेगी। उन्होंने बीजेपी में बढ़ती गुटबाजी को इसकी मुख्य वजह बताया और कहा कि बीजेपी अपनी गुटबाजी के कारण डैमेज कंट्रोल करने में असमर्थ रही है। डहरिया ने दावा किया है कि, कांग्रेस ने अपने पांच वर्षों के शासन में नगरीय निकायों को मजबूत करने का काम किया है। राष्ट्रीय स्तर पर जो बड़े मापदंड स्थापित हुए हैं, उनका सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वार्डों के परिसीमन में गड़बड़ी हुई है, जिससे मतदान प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि जहां भी कम मतदान हुआ, वहां कांग्रेस को सीधा लाभ मिलेगा। बागी कांग्रेसियों की वापसी पर संगठन पर असर प्रदेश में बागी कांग्रेसियों की वापसी को लेकर भी डहरिया ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष ही बेहतर जवाब दे सकते हैं। जब इस संबंध में चर्चा होगी, तब स्थिति स्पष्ट होगी। निष्कासन रद्द करने के आरोपों पर पलटवार कुछ कांग्रेसी विधायकों द्वारा संगठन में निष्कासन रद्द करने के बदले पैसे लेने के आरोपों पर डहरिया ने कहा कि, आरोप लगाना आसान होता है। यह पूरा मामला बीजेपी द्वारा प्रायोजित है। कांग्रेस में पैसा लेकर इस तरह का कोई काम नहीं होता। जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हें अपने दावे के सबूत पेश करने चाहिए। डहरिया के इन बयानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और 15 फरवरी को आने वाले नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम किसके पक्ष में जाते हैं।

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