पुतिन से नजदीकी बढ़ाना चाहता था यौन अपराधी एपस्टीन:नए दस्तावेजों से खुलासा, रूस की मदद करने का ऑफर दिया था

अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) के नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाने की कोशिश कर रहा था। एपस्टीन ने कई मौकों पर पुतिन और उनके करीबी अधिकारियों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए। एपस्टीन 2018 में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के जरिए पुतिन तक अपनी बात पहुंचाना चाहता था। उसने इसके लिए नॉर्वे के पूर्व पीएम थॉर्बजॉर्न यागलैंड से संपर्क किया था। जून 2018 के एक ईमेल में एपस्टीन ने नॉर्वे के पूर्व पीएम थोर्ब्योर्न यागलैंड से कहा था कि वह पुतिन को यह सुझाव दें कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव उससे बातचीत करें। दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन खुद को एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर पेश कर रहा था, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति और निवेश जैसे मुद्दों पर रूस की मदद कर सकता है। रूसी राजदूत से मिलता था अपराधी एपस्टीन CNN की रिपोर्ट के मुताबिक दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि एपस्टीन न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में रूस के तत्कालीन राजदूत विटाली चुरकिन के साथ नियमित संपर्क में था। विटाली चुरकिन 2006 से 2017 तक संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि रहे। इसी दौरान एपस्टीन की उनसे न्यूयॉर्क में मुलाकातें और बातचीत होती थीं। एपस्टीन ने चुरकिन के बेटे मैक्सिम को न्यूयॉर्क की एक वेल्थ मैनेजमेंट फर्म में नौकरी दिलाने में मदद की पेशकश भी की थी। यह बात एपस्टीन के ईमेल्स में सामने आई है। एपस्टीन ने चुरकिन को लेकर यह भी दावा किया कि वह उसकी बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बेहतर तरीके से समझने लगे थे। हालांकि दस्तावेजों में इस दावे का कोई सबूत नहीं मिला है। फरवरी 2017 में विटाली चुरकिन की न्यूयॉर्क में अचानक मौत हो गई थी। इसके बाद एपस्टीन ने 2018 के एक ईमेल में लिखा कि अब वह रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के जरिए फिर से संपर्क बनाना चाहता है। 2013 से ही पुतिन से मुलाकात की कोशिश कर रहा था दस्तावेज बताते हैं कि मई 2013 में एपस्टीन ने इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक को ईमेल कर कहा था कि यागलैंड पुतिन से मिलने वाले हैं और उन्होंने पूछा है कि क्या एपस्टीन भी पुतिन से मिल सकता है। एपस्टीन ने दावा किया था कि वह रूस को पश्चिमी देशों से निवेश लेने के तरीकों पर सलाह दे सकता है। एक अन्य ईमेल में उसने कहा कि अगर पुतिन मिलना चाहते हैं तो उन्हें दो से तीन घंटे का समय देना होगा। मई 2013 के ही एक ईमेल में एपस्टीन ने बिना सबूत के यह दावा किया कि उसने सेंट पीटर्सबर्ग में एक आर्थिक सम्मेलन के दौरान पुतिन से मिलने का अनुरोध ठुकरा दिया था। हालांकि दस्तावेजों में यह साफ नहीं है कि पुतिन ने वास्तव में ऐसी कोई मुलाकात चाही थी या नहीं। पोलैंड में एपस्टीन और रूस के कनेक्शन जांच शुरू पोलैंड में जेफ्री एपस्टीन के रूस से कथित संबंधों को लेकर जांच शुरू की गई है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा है कि एपस्टीन और रूसी खुफिया एजेंसियों के संभावित रिश्तों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कैबिनेट बैठक में टस्क ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आ रही जानकारियां इस ओर इशारा करती हैं कि यह यौन शोषण कांड किसी संगठित खुफिया ऑपरेशन का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने इसे पोलैंड की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। रूस ने एपस्टीन के रूसी खुफिया एजेंसियों से जुड़े होने के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि एपस्टीन को लेकर चल रही जासूसी थ्योरी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर ‘#MeToo’ लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की। ———————- यह खबर भी पढ़ें… एपस्टीन फाइल्स- 10 देशों में इस्तीफे, 80 की जांच:अमेरिका से यूरोप तक असर; राजनेताओं, राजदूतों, अरबपतियों और शाही परिवारों तक फैली जांच अमेरिका में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सीक्रेट दस्तावेज सामने आते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब 30 लाख पेज के डॉक्यूमेंट्स 30 जनवरी को जारी किए हैं। इसके बाद 10 देशों में 15 से ज्यादा बड़े अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा है। 80 से ज्यादा ताकतवर लोगों पर जांच चल रही है। पढ़ें पूरी खबर…

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