शेखावाटी की कलात्मक विरासत और मंडावा की ऐतिहासिक वास्तुकला एक बार फिर एक अनूठी प्रेम कहानी की साक्षी बनी। यहां के एक हेरिटेज होटल में जब इटली के ‘मार्को’ ने मुंबई की ‘जुई’ का हाथ थामा, तो रेगिस्तान की रेत पर भारतीय संस्कारों और यूरोपीय शिष्टाचार का अद्भुत संगम देखने को मिला। रोम से मंडावा तक का सफर: वास्तुकला ने जोड़े दिल यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि कला और प्रेम का मेल था। दुल्हन जुई, जो मुंबई के भावना और जतिन अंबानी की सुपुत्री हैं, रोम (इटली) में एक संरक्षण वास्तुकार (Conservation Architect) के रूप में कार्यरत हैं। वहीं उनके जीवनसाथी मार्को (पुत्र: मासिमो) भी इटली के निवासी हैं। दोनों के कार्यक्षेत्र और कला के प्रति प्रेम ने उन्हें राजस्थान की इस पावन धरा तक पहुंच दिया। 9 ब्राह्मण, संस्कृत श्लोक और ‘इंग्लिश’ में अनुवाद विवाह की सबसे खास बात इसकी शुद्धता और सादगी रही। वृंदावन के भक्त विद्यापीठ से आए 9 प्रकांड विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न कराया। वैश्विक मंच पर सनातन: विदेशी मेहमानों को हमारी परंपराओं की गहराई समझ आए, इसके लिए हर संस्कृत श्लोक का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। विदेशी मेहमान: समारोह में इटली सहित 13 देशों के प्रतिनिधि और दोस्त शामिल हुए, जो भारतीय संस्कृति को इतनी करीब से देखकर अभिभूत नजर आए। रिसेप्शन नहीं, राधा-कृष्ण संग खेली ‘फूलों की होली’ आमतौर पर शादियों में होने वाले शोर-शराबे वाले रिसेप्शन की जगह अंबानी परिवार ने एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शाम चुनी। रात में ब्रज की तर्ज पर ‘फूलों की होली’ का आयोजन किया गया। राधा-कृष्ण के प्रेम को दर्शाते नृत्य ने इटैलियन मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा माहौल गुलाल की जगह फूलों की खुशबू और भक्ति के रस में सराबोर हो गया। इंडो-इटैलियन जायका: मेज पर दिखा संगम होटल मालिक अरविंद पारीक और मधुसूदन खेमानी के अनुसार, मेहमानों के स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। खाने की मेज पर जहां राजस्थानी और भारतीय व्यंजनों का तीखापन था, वहीं यूरोपीय व्यंजनों की नजाकत भी शामिल थी। करीब 200 खास मेहमानों ने इस ‘इंडो-इटैलियन’ फ्यूजन का जमकर लुत्फ उठाया। समानता का संदेश: बहन ने निभाई ‘जव ताल होम’ की रस्म अंबानी परिवार ने इस दौरान समाज को एक प्रगतिशील संदेश भी दिया। विवाह में ‘जव ताल होम अर्पण’ की रस्म आमतौर पर भाई द्वारा निभाई जाती है, लेकिन यहाँ दुल्हन की बहन ऊर्जा अंबानी ने इस जिम्मेदारी को निभाया। इस पहल के माध्यम से परिवार ने यह संदेश दिया कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भी दोनों का अधिकार बराबर है। यह विवाह दर्शाता है कि हमारी सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी और वैश्विक हैं। जब विदेशी मेहमान अग्नि के फेरे लेते हैं, तो वह दृश्य मंडावा के पर्यटन इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ देता है। मधुसूदन सोमानी, आयोजक मण्डावा


