जिले के कोषालय में स्टांप वितरण में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी के आरोपी सहायक ग्रेड-3 (खंजाची) केशव वर्मा को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उनके द्वारा लगाई गई अग्रिम जमानत याचिका को गुना कोर्ट ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। उन पर लगभग 2.70 करोड़ रुपए के स्टांप घोटाले का आरोप है। कोषालय अधिकारी की शिकायत पर दर्ज हुई FIR मामले में जिला कोषालय अधिकारी राकेश कुमार की शिकायत के बाद 29 जनवरी को कैंट थाने में FIR दर्ज की गई थी। उन्होंने 21 जनवरी को पुलिस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। निरीक्षण में खुली परतें बताया गया कि 17 और 18 दिसंबर को संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा ग्वालियर द्वारा कोषालय का निरीक्षण किया गया। इस दौरान IFMIS रिपोर्ट और मौके पर उपलब्ध स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। इसके बाद वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश पर दोबारा जांच कराई गई। 3.74 करोड़ के चालान, एंट्री सिर्फ 1.04 करोड़ की जांच में सामने आया कि कुल लगभग 3.74 करोड़ रुपए के चालान जारी किए गए, लेकिन IFMIS सिस्टम में केवल 1.04 करोड़ रुपए की ही प्रविष्टि दर्ज मिली। शेष करीब 2.70 करोड़ रुपए का हिसाब रिकॉर्ड में नहीं था। सालों से बिना एंट्री जारी हो रहे थे स्टांप जांच प्रतिवेदन में यह भी बताया गया कि वर्ष 2018 से 2025 तक भौतिक रूप से स्टांप तो जारी किए जाते रहे, लेकिन उनकी कंप्यूटर प्रणाली में एंट्री नहीं की गई। इससे शासन को राजस्व हानि होना माना गया। आरोपी बाबू ने आवेदन में मानी गलती कर्मचारी केशव वर्मा ने अपने आवेदन में स्वीकार किया कि निरीक्षण में जो स्टांप कम पाए गए, वे उनसे भूलवश बिना कंप्यूटर प्रविष्टि और कोषालय अधिकारी को जानकारी दिए जारी हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी वेंडर द्वारा दावा किया जाता है, तो वे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार रहेंगे। बिना अनुमति और बिना पावती दिया माल निरीक्षण में यह भी सामने आया कि वास्तविक जरूरत से ज्यादा स्टांप वेंडरों को दिए गए। इसके लिए न तो सक्षम अनुमति ली गई और न ही कोई पावती ली गई। IFMIS प्रणाली के तय नियमों का पालन नहीं हुआ। डबल लॉक से सिंगल लॉक में लाकर वितरण गंभीर बात यह भी रही कि ट्रेज़री के डबल लॉक सिस्टम से स्टांप निकालकर बिना अनुमति सिंगल लॉक में लाए गए और वहां से वितरित कर दिए गए। बैंक और वेंडरों से संबंधित रसीदें भी सुरक्षित नहीं रखी गईं। कोषालय संहिता के नियमों की अनदेखी कैंट थाने को भेजे गए पत्र में कहा गया कि मप्र कोषालय संहिता 2020 के नियम 16 से 24 के तहत अभिलेखों और स्टॉक का सही संधारण नहीं किया गया। इसी वजह से चालान एंट्री, स्टांप निर्गमन और पावती में बड़ी अनियमितताएं लंबे समय तक पकड़ में नहीं आ सकीं। खंजाची को माना जिम्मेदार प्रकरण में शासन को हुई आर्थिक हानि के लिए प्राथमिक रूप से खंजाची केशव वर्मा को जिम्मेदार माना गया। इसी आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। FIR के बाद कोषालय अधिकारी भी निलंबित मामले में FIR दर्ज होने के अगले ही दिन वित्त विभाग ने जिला कोषालय अधिकारी राकेश कुमार को भी निलंबित कर दिया था। अग्रिम जमानत की कोशिश नाकाम मामला दर्ज होने के बाद आरोपी की ओर से गुना कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन पेश किया गया था, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया। अब पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।


