सिवाना उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत पादरड़ी कल्ला में जन्मे कुलदीप जांगिड़ आज क्षेत्र में सर्प मित्र के रूप में पहचाने जाते हैं। पहाड़ी इलाका होने के कारण यहां सांपों का विचरण आम है। ऐसे में जहां भी सांप निकलने की सूचना मिलती है, कुलदीप तुरंत मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करते हैं और सांपों को वन्य क्षेत्र में छोड़ देते हैं। अब तक वे 400 से अधिक स्थानों से विभिन्न प्रजातियों के सांपों का सफल रेस्क्यू कर चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है। करीब 15 वर्ष पहले कुलदीप ने सांपों को पकड़ने और उनका रेस्क्यू करने का काम शुरू किया। शुरुआत में वे भी आम लोगों की तरह हर सांप को जहरीला मानते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में सांप व बिच्छू जैसे जीवों का दिखना सामान्य है, जो कई बार भोजन की तलाश में घरों तक आ जाते हैं। जानकारी के अभाव में लोग अक्सर डर के कारण सांपों को मार देते हैं। यह बात कुलदीप को खली। उन्होंने सांपों की विभिन्न प्रजातियों का अध्ययन किया और उनकी प्रकृति व प्रवृत्ति को समझा। इसके बाद वे अपने घर और गांव में दिखने वाले सांपों को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ने लगे, ताकि लोगों का डर कम हो। सर्प मित्र के रूप में बनी पहचान, 90 फीसदी रेस्क्यू भारतीय सांपों के कर चुके हैं अपने गांव से शुरू हुआ यह प्रयास धीरे-धीरे आसपास के क्षेत्रों तक फैल गया। कुलदीप ने सांपों को अपना मित्र मानते हुए हादसों में घायल सांपों का उपचार और रेस्क्यू भी शुरू किया। जैसे-जैसे उनके काम की जानकारी फैली, नजदीकी गांवों से लोग उन्हें बुलाने लगे। वे अपने मुख्य व्यवसाय से समय निकालकर रेस्क्यू के लिए पहुंचते हैं। टांकों व कुओं से भी वे कई खतरनाक सांपों को सुरक्षित बाहर निकाल चुके हैं। आज कुलदीप क्षेत्र में सर्प मित्र के रूप में पहचान बना चुके हैं।कुलदीप ने करीब 90 प्रतिशत से अधिक रेस्क्यू भारतीय नागों के रहे हैं, जिनमें करीब सात फीट लंबे नाग भी शामिल हैं। भारतीय नाग देश के अत्यधिक जहरीले सांपों में गिना जाता है। भारत में सर्पदंश से होने वाली अधिकांश मौतें भारतीय नाग, सिंध करैत व रसेल वाइपर के काटने से होती हैं। कुलदीप ने बताया कि सांपों को इंसानी बस्तियों से सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ना है, ताकि इंसान और सांप दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। मित्र गोपालसिंह राजपुरोहित की सलाह पर कुलदीप सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वे रेस्क्यू ऑपरेशन के वीडियो साझा कर आमजन को जानकारी देते हैं। हर जीव को जीने का अधिकार है और पर्यावरण संतुलन में प्रत्येक जीव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साथ ही वे अपील करते हैं कि उनके वीडियो देखकर कोई भी बिना जानकारी और प्रशिक्षण के सांप पकड़ने की कोशिश न करें।


