खंडवा में एक शादी कार्यक्रम में खर्चीले रीति-रिवाज से हटकर नवाचार किया गया हैं। एक तरफ पेरावणी यानी कपड़े-उपहार का लेनदेन बंद रखा गया। वहीं शगुन के रूप में मात्र 50 रूपए लिए। ये राशि भी गांव के निर्माणाधीन मंदिर में दान कर दी। खास बात यह है कि, नवदंपती सरकारी अफसर हैं। शादी से पहले ही उन्होंने तय कर लिया था कि यह विवाह सादगीपूर्ण होगा। दरअसल, यह आयोजन खरगोन-खंडवा जिले की बार्डर पर स्थित ग्राम बांगरदा में हुआ हैं। दूल्हा और दुल्हन एक ही गांव के रहने वाले है। दुल्हा डॉ. दीपक करोड़ा, खंडवा के खालवा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बतौर मेडिकल ऑफिसर पदस्थ हैं। वहीं, दुल्हन अपेक्षा चौधरी, खंडवा में कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर हैं। डॉक्टर करोड़ा के पिता किसान व अपेक्षा के पिता हुकुम चौधरी पुलिस सब इंस्पेक्टर हैं। शादी में हुए नवाचार को समाजजन, रिश्तेदार और दूसरे समाजों के लोग भी मिसाल दे रहे हैं। शगुन की राशि मंदिर में दी, पेरावणी प्रथा बंद रखी दुल्हन अपेक्षा के पिता हुकुम चौधरी बताते है कि, 5 फरवरी को शादी हुई थी। अगले दिन 6 फरवरी को आर्शीवाद समारोह हुआ। शादी में पेरावणी प्रथा को बिल्कुल बंद रखा गया। वहीं समारोह में जितने भी मेहमान आए, उनसे शगुन के तौर पर सिर्फ 50 रूपए लिए गए। समारोह में ही तीन काउंटर लगा दिए गए थे, जहां से ज्यादा राशि रिटर्न कर दी गई। पूरी राशि हमने गांव के निर्माणाधीन मंदिर में दान कर दी।


