बैतूल जिले के शाहपुर क्षेत्र के मालवर गांव में मांझी अंतरराष्ट्रीय समाजवाद आदिवासी किसान सैनिक संस्था के तीन दिवसीय सम्मेलन में सेना में ‘कंगला मांझी रेजिमेंट’ बनाने की मांग प्रमुखता से उठी। शनिवार को शुरू हुए इस कार्यक्रम का समापन आज (सोमवार) होगा। सम्मेलन में वक्ताओं ने आदिवासी वीरों के बलिदान को याद करते हुए उनके सम्मान में सेना में अलग रेजिमेंट की वकालत की। सम्मेलन में एडवोकेट और अल हिन्द पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमकार नाथ कटियार ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में आदिवासी समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने बिरसा मुंडा, सरदार विष्णु सिंह गोंड, मोहकम सिंह गोंड, रेंगा कोरकू, मनकी बाई, सम्मो बाई, गंजन सिंह कोरकू और हीरा सिंह उर्फ कंगला मांझी जैसे वीरों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन वीरों ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा और देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। वंशजों को प्रशिक्षित करने की मांग कटियार ने जोर देकर कहा कि ऐसे वीर शहीदों के सम्मान में कंगला मांझी के नाम पर सेना में एक स्वतंत्र रेजिमेंट का गठन किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य उनके वंशजों और समाज के युवाओं को प्रशिक्षित कर पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना है। ‘शहीदी गांव घोषित कर मिले सहायता राशि’ कार्यक्रम में अंग्रेजों के शासनकाल में छीनी गई आदिवासियों की जमीनें वापस करने या उनकी उचित क्षतिपूर्ति देने की मांग भी रखी गई। साथ ही, जिन गांवों को अंग्रेजों ने जलाया या उजाड़ा था, उन्हें ‘1857 शहीदी गांव’ घोषित कर पुनर्वास के लिए एक अरब रुपए की सहायता राशि प्रदान करने की मांग की गई। राजमाता और गणमान्य रहे मौजूद इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजमाता फुलवा देवी कांगे और केडी कांगे उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में राहुल उइके, सहनवती कवड़े, शशिकला सलामे, दिनेश धुर्वे, आरएन ठाकुर, श्रवण परते और रामप्रसाद इवने सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। उद्घाटन अवसर पर राजमाता फुलवतीदेवी कांगो ने समाज को एकता और स्वाभिमान का संदेश दिया था।


