रिटायरमेंट से 5 महीने पहले फंदा लगा सुसाइड करने वाले अलवर के अकबरपुर थाना क्षेत्र के निर्भमपुरा गांव निवासी सीनियर टीचर बड्डन लाल भलाई (59) केस में पुलिस ने उसके स्कूल के 7 सरकारी टीचर पर टॉर्चर करने का मुकदमा दर्ज कर लिया। जिनमें स्कूल के टीचर अनिल कुमार वर्मा, रोशन लाल यादव, प्रतेंद्र सिंह, सीमा गुप्ता, राजेंद्र कुमार, गिरीराज प्रसाद व ऋषि कुमार शामिल हैं। ग्रामीण CO ने कहा कि मृतक के बेटे ने रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है। पोस्टमार्टम के बाद सुसाइड नोट के आधार पर जांच की जाएगी। टीचर ने 4 पेज में करीब 2000 शब्दों का सुसाइड नोट लिखा था। टीचर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास, उमरैण में कार्यरत था। जिसने रविवार शाम को खुद के गांव में घर से 100 मीटर दूर बाड़े में फंदा लगा सुसाइड कर लिया था।
सीनियर टीचर बड्डन लाल भलाई पिछले 25 वर्षों से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास में कार्यरत था। जो 38 वर्ष की सरकारी सेवा पूरी कर चुका था। इसी साल 30 जून को रिटारयरमेंट था। लेकिन उससे 4 महीने पहले ही सुसाड कर लिया। टीचर के परिवार में पत्नी, तीन बेटे, पुत्र वधु और पोतियां हैं, जो पूरी तरह उन पर आश्रित हैं। मौके से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें शिक्षक ने स्कूल के कुछ अध्यापकों और प्रिंसिपल पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट में शिक्षक ने बताया कि वे पिछले चार-पांच वर्षों से मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो गया था। बेटे की शादी से ठीक पहले गंभीर ब्रेन स्ट्रोक आया था, जिससे शरीर का आधा हिस्सा पैरालाइज हो गया, आंखों की रोशनी कम हो गई और मानसिक संतुलन भी प्रभावित हुआ।
शिक्षक ने लिखा कि इतनी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद उनसे लगातार भारी प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य कराए जाते रहे। उनके पास निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण, वर्क बुक, लाइब्रेरी, कक्षा 1 से 12 तक का चार्ज और PEEO नोडल के तहत आठ विद्यालयों का अतिरिक्त कार्यभार था। बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कोई भी शिक्षक उनका चार्ज लेने को तैयार नहीं हुआ। सुसाइड नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ शिक्षक शराब के नशे में गाली-गलौज करते थे और धमकियां देते थे। कि “हमारी पहुंच ऊपर तक है, तेरी नौकरी खा जाएंगे, रिटायरमेंट नहीं लेने देंगे।” शिक्षक ने लिखा कि उन्होंने इस संबंध में प्रिंसिपल को भी अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें “जैसे भी हो काम करो” कहकर टाल दिया गया।
घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरना दिया। सूचना मिलने पर ग्रामीण सीओ शिवानी शर्मा जिला अस्पताल पहुंचीं और परिजनों से वार्ता कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। समझाइश के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए।


