रबी की फसल सोयाबीन के उत्पादन में समस्या आई तो खंडवा जिले में जलकुआं के किसान भूपेंद्र सिंह पंवार ने 2 साल पहले खेती का तरीका ही बदल दिया। उन्होंने औषधि खेती की शुरुआत की और मूसक दाना (कस्तूरी भिंडी) लगाई। इससे लागत कम होने के साथ ही मुनाफा बढ़ गया। जितनी आमदनी सोयाबीन और गेहूं से होती थी। अब उससे दो गुना मुनाफा होने लगा है। किसान भूपेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि बरसों से सोयाबीन की खेती कर रहे थे। लेकिन, सोयाबीन की फसल में समस्या आने लगी। उत्पादन प्रभावित होने पर मन में औषधि खेती का विचार आया और इसकी शुरुआत कर दी। कस्तुरी भिंडी (मूसक दाना) की लगाया। इसके लिए बीज नीमच मंडी से लाए। बोवनी के बाद पर्याप्त पानी मिलने से फसल भी अच्छी आई। इससे आस-पास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। मई-जून में तैयार कर रहे नर्सरी
किसान ने बताया मूसक दाना की खेती करने के लिए मई-जून में नर्सरी तैयार करते हैं। इसमें तैयार किए पौधों को जुलाई में खेत में रोपते हैं। खेत में लगाते समय पौधों की कतार के बीच 3-3 फीट की दूरी और पौधों के बीच 1-1 फीट का अंतर रखा जाता है। समय-समय पर निंदाई गुड़ाई और यूरिया-डीएपी के उपयोग से बढ़िया फसल आई। खेती बदलने से ऐसे बढ़ा मुनाफा
किसान ने बताया पहले प्रति एकड़ गेहूं और सोयाबीन लगाने पर करीब 5 हजार रुपए की कमाई होती थी। अब एक लाख रुपए तक का फायदा होने लगा है। इसीलिए क्षेत्र के अन्य किसान भी औषधिय खेती शुरू कर रहे हैं। अब प्राकृतिक खेती के लिए कर रहे तैयारी
किसान ने बताया कि आने वाले समय में पूरी तरह प्राकृतिक खेती करेंगे। इसके लिए तैयारी कर रहे हैं। खेत में ही जीवामृत, ब्रह्मास्त्र, बीजामृत और छिड़काव के लिए दसपर्णी अर्क तैयार करेंगे। जीवामृत तैयार कर रहे हैं। इसके लिए 10 लीटर गौमूत्र और 10 किलो गोबर, 1 किलो चने की दाल, 1 किलो गुड़, जंगल से पेड़ के पास की मिट्टी लाए हैं। इसे 200 लीटर के ड्रम में पानी के साथ मिश्रण तैयार करके 7 दिन के लिए रखा जा रहा है। सुबह-शाम घड़ी दिशा में घुमाने के बाद यह मिश्रण खेत में डालने के लिए तैयार होता है।


