कोटा में तीन मंजिला रेस्टोरेंट बिल्डिंग ढ़ह जाने के बाद अब अवैध निर्माण को लेकर मुददा तेजी से उठने लगा है। सोमवार शाम को नायक संस्था के युवाओं ने केडीए की कुछ नोटशीट दिखाते हुए आरोप लगाए कि जिन भवनों को केडीए ने अवैध निर्माण माना उन्हें पूरा बनने दिया गया। उनका निर्माण काम न तो रूकवाया गया न ही तोड़ा गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं की संस्था नायक के प्रतिनिधियों ने केडीए पहुंचकर केडीए के बोर्ड के नीचे पोस्टर चिपका दिया। कार्यकर्ताओं ने यहां कोटा विकास प्राधिकरण के बोर्ड के नीचे अवैध निर्माण विकास प्राधिकरण का पोस्टर लगा दिया। संस्था के शंशाक ने बताया कि- रंगबाडी पुनर्वास कॉलोनी में 7 मंजिला बिल्डिंग का निर्माण को केडीए, तत्कालीन यूआईटी ने नोटशीट में अवैध निर्माण माना था। एलआईसी भवन के सामने बन रही इस बिल्डिंग को निर्धारित मापदंडो के अनुरूप नहीं माना गया था और कार्यवाही के लिए अधिकारियों को भेजा गया था। 13 जनवरी 2025 को ये नोटशीट चली थी लेकिन आज तक इस पर कोई एक्शन नहीं हुआ। शंशाक ने बताया कि इसी तरह विश्वकर्मा नगर स्पेशल में मेन रोड पर भूखंड संख्या 33-34 में अवैध रूप से निर्माण किया गया है। इसे भी केडीए ने गलत माना था और कार्यवाही के लिए नोटशीट चलाई गई थी। लेकिन वहां होटल बनकर तैयार हो चुके है। यहां दस मंजिला अवैध निर्माण कर लिया गया लेकिन कागजों में ही कार्यवाही चलती रही। एक साल इस नोटशीट को भी चले हुए हो गया है। शंशाक ने बताया कि केडीए की तरफ से आंखे मूंद ली गई और शहर में अवैध निर्माण होते रहे। इसी तरह निगम के अधीन आने वाले भवनों में भी ऐसे ही निर्माण हो रहे है। फिर भले ही बिल्डिंग गिरे और लोगों की मौत हो। उन्होंने कहा कि जल्द ही शहर की ऐसी सौ भवनों की लिस्ट जारी की जाएगी जो बिना अनुमति और अवैध तरीके से बनाई गई है। वहीं इस बारे में जब डिप्टी कमीश्नर मालविका से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।


