पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में फॉरेन लैंग्वेज सीखने वालों की दिलचस्पी कम होती जा रही है। साल दर साल यह संख्या कम हो रही है। विवि में ऑन रिकार्ड विदेशी भाषाओं के तीन कोर्स हैं। इसमें अभी फ्रेंच की पढ़ाई ही हो रही है। रशियन व जर्मन में छात्रों की संख्या शून्य है। कई बरसों से इस कोर्स में दाखिले नहीं हुए हैं। अन्य भाषाओं में छत्तीसगढ़ी की डिमांड अब भी है। वहीं दूसरी ओर हिंदी व अंग्रेजी की भी सीटें भर जाती है। राज्य बनने के पहले रविवि में फॉरेन लैंग्वेज के कोर्स शुरू हुए थे। शुरुआती बरसों में तो इसके प्रति छात्रों का रुझान था। धीरे-धीरे यह कम होता गया। यहां फ्रेंच, रशियन व जर्मन का एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है। प्रत्येक में 30-30 सीटें हैं। इन कोर्स की हालत भी खराब है। 30 में से कम से कम 10 सीटों में प्रवेश होने पर ही संबंधित कोर्स की क्लास लगती है। पिछले कई वषों से रशियन व जर्मन की क्लासेस नहीं लगी। क्योंकि इसमें एडमिशन नहीं हुए। विवि के अधिकारियों का कहना है कि फ्रेंच पढ़ाने के लिए शिक्षक हैं। लेकिन अन्य दोनों कोर्स के लिए शिक्षक भी नहीं मिलते। वहीं इनके प्रति छात्रों की दिलचस्पी भी कम है। हाल ही में विवि में लैंग्वेज लैब को अपडेट किया गया है। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाएं की जा रही है। इसे लेकर इस बार डिप्लोमा इन रशियन लैंग्वेज की पढ़ाई भी शुरू होने की संभावना है। एमकॉम थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा में 95 प्रतिशत छात्र पास : पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की ओर से एमकॉम तृतीय सेमेस्टर समेत 10 परीक्षाओं के नतीजे जारी किए गए। एमकॉम में 95 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। एमएससी व एमएसडब्ल्यू थर्ड सेमेस्टर का रिजल्ट 98 प्रतिशत से अधिक रहा। इस सप्ताह यूजी फर्स्ट ईयर के नतीजे भी आने की संभावना है। एमकॉम की परीक्षा मंे 824 परीक्षार्थी थे। इसमें से 782 पास हुए। 5 फेल और 37 को एटीकेटी मिला। एमएसडब्ल्यू में 57 में से 56 छात्र पास हुए हैं। एमए छत्तीसगढ़ी की डिमांड अब भी
प्रदेश में छत्तीसगढ़ी की संभावनाओं को लेकर रविवि में 2013-14 में एमए छत्तीसगढ़ी का कोर्स शुरू किया गया। जब यह शुरू किया गया तब न तो इसकी पढ़ाई स्कूल में हो रही थी और न ही कॉलेज स्तर पर। विवि में इस भाषा पर सीधे पीजी कोर्स शुरू हुआ। एडमिशन के लिए ग्रेजुएशन की पात्रता तय की गई। इस कोर्स की शुरुआत 100 सीटों से हुई। पहले वर्ष में छात्रों का रुझान अच्छा रहा। तब मेरिट के आधार पर एडमिशन दिए गए। अधिकांश सीटें भर गई। दूसरे साल भी प्रवेश को लेकर इसकी स्थिति अच्छी रही। इसके बाद के बरसों में सीटों की संख्या को घटाकर 40 किया गया। इसमें से अधिकांश सीटें भर जाती है। इसी तरह पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के दूसरे विवि में भी एमए छत्तीसगढ़ी का कोर्स शुरू किया गया है। रविवि के भाषा विज्ञान विभाग में एमए भाषा विज्ञान का कोर्स भी है। इसमें 20 सीटें हैं। इसके प्रति भी छात्रों का रुझान कम हुआ है।


