आपने बिहार का चारा घोटाला सुना होगा। वहां गायों को चारा पहुंचाया ही नहीं और बता दिया गया कि गायों ने कई ट्रक चारा खा लिया। इसी तरह जिले की अरथूना पंचायत समिति में हैंडपंप घोटाला हुआ है। वर्ष 2019 से 2023 तक पंचायत समिति की ओर से खुदवाए गए 526 हैंडपंप की जांच में 64.48 लाख रुपए का भ्रष्टाचार निकला। पांच साल की समयावधि में 6 बीडीओ, 3 अकाउंटेंट, 4 एईएन ने मिलकर 5 बोरवेल कंपनियों को 64.48 लाख रुपए का ज्यादा भुगतान किया। 9 हैंडपंप खोदे ही नहीं लेकिन उनका भुगतान कर दिया गया। 12 हैंडपंप का दो बार भुगतान किया गया। यह पूरी राशि जांच कमेटी ने वसूली योग्य मानी है। इन सभी के बावजूद जांच कमेटी ने इस समयावधि में प्रधान रही कल्पना कटारा और वर्तमान प्रधान राजू मईड़ा के बारे में कुछ भी जिक्र नहीं किया है। जांच कमेटी ने 64.48 लाख रुपए की वसूली 5 बोरवेल कंपनियों से करने की सिफारिश की है। 6 बीडीओ, 3 अकाउंटेंड और 4 एईएन को स्पष्ट रूप से दोषी माना है लेकिन इनसे वसूली की सिफारिश नहीं की है। कमेटी ने इन 13 कर्मचारी-अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है। यह जांच वर्ष 2023 तक खोदे गए हैंडपंपों की है। वर्ष 2024 व 2025 में खोदे गए हैंडपंपों की जांच होना बाकी है। उप प्रधान व उनके करीबी की फर्मों को भुगतान किया, पूर्व प्रधान कटारा और वर्तमान प्रधान मईड़ा का जिक्र नहीं टेंडर में क्या शर्तें थी और मौके पर क्या किया गया ये कर्मचारी, अधिकारी व बोरवेल कंपनियां दोषी “पंचायत हैंडपंप खुदाई और भुगतान में कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। इसके अनुसार अब आगे की कार्रवाई कर रहे हैं।”
– गोपाललाल स्वर्णकार, सीईओ, जिला परिषद


