सेहत से खिलवाड़:राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के अधिकारियों की लापरवाही एड्स के मरीजों को पड़ रही भारी

स्वास्थ्य भवन के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा एड्स मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के अधिकारियों की लापरवाही के चलते पिछले 8 माह से 100 से ज्यादा आइस लाइनर रेफ्रिजरेटर (आईएलआर) व स्टेबलाइजर धूल फांक रहे हैं। जिससे एड्स मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। दवाओं व जांच किट को उचित तापमान में रखने के लिए खरीदे गए आईएलआर राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बेसमेंट में कबाड़ में पड़े हैं। अब सवाल उठता है कि स्वास्थ्य भवन में प्रोजेक्ट डाइरेक्टर (एड्स), निदेशक (एड्स) के समेत अनेक अधिकारियों के बैठने के बावजूद इस तरफ किसी का भी ध्यान क्यों नहीं गया। आए दिन मीटिंग, सेमिनार में भी शामिल होते हैं। क्या है मामला राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से जयपुर समेत प्रदेश के इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेन्टर (आईसीटीसी) पर भेजने के लिए आईएलआर खरीदे थे। लेकिन सेन्टरों पर नहीं भेजने पर अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगता है। मौजूदा स्थिति में मेडिकल कॉलेजों, जिला, उपजिला, सैटेलाइट समेत 153 अस्पतालों में आईसीटीसी सेन्टर संचालित हैं। आइस लाइनर रेफ्रिजरेटर को सामान्य बोलचाल की भाषा में इसे बर्फ के अस्तर वाले रेफ्रिजरेटर कहते हैं, जिसका तापमान 2 डिग्री रहता है। इसमें 8 घंटे बिजली उपलब्धता पर भी सुरक्षित दवा व किट्स रखे जाते हैं। जानकारी के अनुसार आईसीटीसी सेन्टरों पर पुराने आईएलआर रखे हुए थे। जिनके स्थान पर नए आईएलआर भेजने थे। जिम्मेदारों का जवाब…भास्कर ने दो जिम्मेदारों से मोबाइल फोन पर संपर्क किया। जिनमें से परियोजना निदेशक ( एड्स) शाइन अली खान ने फोन तक नहीं उठाया। जबकि निदेशक (एड्स) डॉ.ओ.पी. थाकन से मामले के बारें में बताने पर कहा कि मुझे किसी तरह का आइडिया नहीं है। टॉयलेट जाने को चक्कर लगा रहा स्टाफ आरएमएससीएल के बेसमेंट में संचालित राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के स्टाफ को टॉयलेट के लिए पिछले 15 दिन से चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। मुख्य भवन में जाने के लिए पहले रास्ता था, जिसको ताला लगाकर बंद कर दिया है। ऐसे में टॉयलेट जाने के लिए पूरे भवन के चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। विशेषकर महिलाओं को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि टॉयलेट की सुविधा विकसित करने के लिए हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुके हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *