बांधवगढ़ में रेस्क्यू बाघिन वापस जंगल में छोड़ी गई:अधिकारी बोले- फ्रेंडली व्यवहार के कारण दूसरे जंगल में छोड़ना सुरक्षित नहीं था

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला जोन से पकड़ी गई चार वर्षीय बाघिन को सोमवार को दमना क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया, जहां से उसे शुक्रवार को रेस्क्यू किया गया था। पहले इस बाघिन को राजस्थान भेजने की तैयारी चल रही थी, लेकिन उसके मिलनसार व्यवहार को देखते हुए विशेषज्ञों ने इसे दूसरे राज्य में शिफ्ट करना असुरक्षित माना। पर्यटकों से नहीं था डर, इसलिए बदला फैसला बाघिन को पकड़ने के बाद उसे बहेरहा इंक्लोजर में रखा गया था, जहां वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के डॉक्टर ने उसकी हर हरकत पर नजर रखी। इस दौरान यह बात सामने आई कि बाघिन पर्यटकों और उनके वाहनों को देखकर डरती नहीं है। इंसानी गतिविधियों के बीच रहने के कारण वह काफी सहज हो चुकी थी और उसने कोई आक्रामक व्यवहार नहीं दिखाया। अधिकारियों का मानना है कि जो बाघिन इंसानों के प्रति इतनी ‘फ्रेंडली’ हो, उसे किसी बिल्कुल नए और अनजान जंगल में छोड़ना उसकी जान को खतरे में डाल सकता था। बाघ प्रेमियों की मांग आई काम बाघिन को पकड़ने और उसे बांधवगढ़ से बाहर भेजने की खबर मिलते ही वन्यजीव प्रेमियों ने मोर्चा खोल दिया था। बाघ प्रेमियों ने सोशल मीडिया और पत्रों के माध्यम से उच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई थी कि इस बाघिन को यहीं रहने दिया जाए। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का तर्क था कि जब बाघिन ने कभी किसी पर हमला नहीं किया, तो उसे उसके घर से दूर करना ठीक नहीं है। सुरक्षा मानकों के तहत हुई वापसी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) के नियमों का पालन करते हुए बाघिन का परीक्षण किया गया। सभी सुरक्षा मानकों के मूल्यांकन के बाद यह साफ हुआ कि बाघिन का तबादला करना सही नहीं होगा। अंततः सोमवार को उसे वापस उसके मूल इलाके दमना में छोड़ दिया गया। अब वन विभाग की टीम रेडियो कॉलर या ट्रैकिंग के जरिए उसकी निगरानी करेगी।

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