भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा किताबों और यूनिफॉर्म की खरीद को लेकर की जा रही कथित मनमानी एक बार फिर विवाद के केंद्र में आ गई है। अभिभावकों पर तय दुकानों से ही सामग्री खरीदने का दबाव बनाने के आरोपों को लेकर अखिल भारत हिंदू महासभा ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से लेकर भोपाल कलेक्टर को ज्ञापन सौंपें हैं। वहीं, सोमवार को 9 मसाला रेस्टोरेंट में एक प्रेस वार्ता भी की गई। जिसमें संगठन के देवेंद्र तिवारी ने कहा कि यह पुस्तक जिहाद है। देवेंद्र तिवारी के अनुसार, कई नामी निजी स्कूल शिक्षा को व्यापार बना चुके हैं। जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। वहीं, इस पूरे विवाद में जिन दुकानों पर आरोप लगे हैं, उनमें से एक गुडलक बुक स्टोर के संचालक ने भी सामने आकर अपना पक्ष रखा है। लवजिहाद की जताई गई अशंका देवेंद्र तिवारी ने कहा कि गुड लक बुक स्टोर के मालिक आरिफ खान के यहां काम करने वाले कर्मचारी 90 मुसलमान है। वहां पुस्तक खरीदने वाली ज्यादा तर हिंदू महिलाएं जाती हैं। जिनको एक दो किताब कम दी जाती है और बाद में फोन करके आने को कहा जाता है। जिससे दुकानदार के पास नंबर पहुंच जाता है। संगठन को आसंका है कि आगे चलकर इससे लवजिहाद फैलाया जा सकता है। विवाद के बाद दुकानदार ने तोड़ी चुप्पी विवाद के बीच गुडलक बुक स्टोर के संचालक आरिफ खान ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर टार्गेट किया जा रहा है और उनका किसी भी स्कूल से कोई टाई-अप नहीं है। आरिफ खान के अनुसार स्कूल अपनी किताबों की सूची नोटिस बोर्ड पर लगाते हैं और उसी के आधार पर वे एजेंसियों से किताबें मंगवाते हैं। अभिभावक अपनी सुविधा से दुकान पर आते हैं, इसमें किसी तरह की जबरदस्ती नहीं होती। निजी स्कूलों पर जबरन खरीद के आरोप अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष रोहित दुबे द्वारा 10 जनवरी 2026 को शिक्षा मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा था कि भोपाल के कई निजी स्कूल अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें, यूनिफॉर्म, जूते और अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। यदि कोई अभिभावक बाहर से सामान खरीदने की कोशिश करता है तो बच्चे को स्कूल में प्रताड़ित किया जाता है या उसे मानसिक दबाव में रखा जाता है। इसी बात को सोमवार को प्रेस वार्ता के दौरान फिर दोहराया गया। नियमों के खिलाफ सालों से चल रही व्यवस्था संगठन का आरोप है कि यह व्यवस्था वर्षों से चल रही है, जबकि शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार कोई भी स्कूल अभिभावकों को एक ही दुकान से किताब या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इसके बावजूद स्कूलों से जुड़े दुकानदारों को फायदा पहुंचाने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है और बाजार से कहीं अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। इन स्कूलों के नाम भी आए सामने ज्ञापन में भोपाल के कई प्रतिष्ठित स्कूलों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इनमें दिल्ली पब्लिक स्कूल, आईईएस स्कूल, बॉनिफाइड स्कूल, सेंट पी. जी. इंटरनेशनल स्कूल, कैंब्रिज स्कूल, ओरिएंटल स्कूल और मदर टेरेसा स्कूल प्रमुख हैं। संगठन का दावा है कि इन स्कूलों में तय दुकानों से ही किताब और यूनिफॉर्म खरीदने की परंपरा चल रही है। अभिभावकों पर बढ़ता आर्थिक बोझ अखिल भारत हिंदू महासभा का कहना है कि भोपाल में 100 से अधिक निजी स्कूल हैं, जहां किताबों के साथ-साथ यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री भी एक ही दुकान से खरीदने को कहा जाता है। इससे हर साल अभिभावकों को हजारों रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं, जो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। ‘100 स्कूलों की किताब बेचने का दावा गलत’ आरिफ खान ने यह भी कहा कि 100 से अधिक स्कूलों की किताबें बेचने का आरोप पूरी तरह अव्यवहारिक है। वे एक छोटे व्यापारी हैं और इतनी बड़ी सप्लाई करना उनके लिए संभव ही नहीं है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई जांच के बाद खुद सामने आ जाएगी। कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट जाएंगे अखिल भारत हिंदू महासभा ने साफ कहा है कि यदि इस पूरे मामले में जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन हाई कोर्ट में जाएंगे। इससे पहले वे मंगलवार को कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई में शामिल होने पहुंचेंगे। संगठन का कहना है कि शिक्षा को व्यापार बनने से रोकना जरूरी है और अभिभावकों के हितों की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।


