संतों की घोषणा: महापड़ाव जारी रहेगा…बोले- हम जयपुर से आपके लिए कुछ भी नहीं ला सके

खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत महापड़ाव पर बैठे सैकड़ों पर्यावरण प्रेमियों के चेहरे पर उस वक्त उदासी छा गई, जब संत भागीरथ दास शास्त्री निराशा भरे भाव से बोले-हम जयपुर से आपके लिए कुछ भी लेकर नहीं आ सके। उन्होंने संभागीय आयुक्त की ओर से जिला कलेक्टर को लिखा एक पत्र को पढ़कर सुनाया। सीएम से वार्ता विफल होने की जानकारी देते हुए महापड़ाव जारी रखने की घोषणा कर दी। जयपुर में मुख्यमंत्री से मिलकर संतों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार सुबह बीकानेर लौट आया। संत दिनभर राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित राजस्व विभाग के आदेश का इंतजार करते रहे। शाम को सर्किट हाउस में उन्हें संभागीय आयुक्त की ओर से जिला कलेक्टर को लिखा गया पत्र थमा दिया गया। पत्र में लिखा है, “खेजड़ी को लेकर कानून अतिशीघ्र लागू किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही राज्य सरकार प्रदेश में खेजड़ी संरक्षण एवं अवैध कटाई नहीं होने देने के प्रति पूर्णत संकल्पित है।’ संत भागीरथ दास शास्त्री बोले, सीएम से राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर रोक लगाने की मांग की थी। सोमवार को 160 पर्यावरण प्रेमी क्रमिक अनशन पर बैठे। उधर, लाखूसर में सोलर प्लांट पर नहीं पहुंचा राजस्व विभाग का दल लाखूसर में सनब्रिज सोलर कंपनी के प्लांट पर काफी संख्या में खेजड़ी के पेड़ काटे गए हैं। पटवारी सहित राजस्व विभाग के दल को रविवार को 24 नंबर ब्लॉक में 40 खेजड़ी कटी हुई मिली थी। रात होने के बाद दल वापस लौट गया। सोमवार को सुबह फिर उन्हें मौके पर जाना था। वन विभाग की टीम कंपनी के गेट पर इंतजार करती रही, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। वनकर्मियों ने बताया कि दूसरे ब्लॉक में कटी हुई खेजड़ियां पड़ी हैं, लेकिन वहां का रास्ता नहीं जानते। भास्कर ने पटवारी, तहसीलदार आैर एसडीएम से बात करनी चाही, लेकिन सभी के फोन नो रिप्लाई हो गए। 8 दिनों से चल रहा महापड़ाव जारी रहेगा। सरकार से वार्ता विफल हो गई है। संभागीय आयुक्त का एक औपचारिक पत्र जारी किया गया है। उसके बाद भी जोधपुर के पल्ली गांव में 500 खेजड़ियां कट गईं। सरकार खेजड़ी की कटाई रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही है। इसलिए लड़ाई जारी रहेगी।परसराम बिश्नोई, संयोजक, खेजड़ी बचाओ आंदोलन सिर पर कलश, कलश में खेजड़ी : हरियाली के लिए बीकानेर की सड़कों पर उतरी महिला ब्रिगेड ये कलश यात्रा है। पर्यावरण की रक्षा का संकल्प है। मरुधरा की लाइफलाइन कही जाने वाली खेजड़ी को बचाने की जिद है। बीकानेर में इन दिनों खेजड़ी बचाओ, पर्यावरण बचाओ आंदोलन चल रहा है। 51 लोगों के रोज क्रमिक अनशन पर बैठने की घोषणा की गई है। रोज क्रमिक अनशन पर बैठने वालों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ जा रही है। इसी आंदोलन के मंच से घोषणा की गई थी कि सोमवार को महिलाएं कलश यात्रा निकलेंगी। लंबी तैयारियों और बड़े-बड़े महात्माओं की अपील के बाद भी इतनी विशाल कलश यात्राएं कम ही देखने को मिलती हैं। मगर महागुरु जंभोजी के आदर्शों में शामिल पशु और पेड़ों की रक्षा का वचन शामिल है। इसी के मद्देनजर विश्नोई समाज के लोग बीकानेर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर खेजड़ी कटान को रोकने के लिए सालों से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार इससे पहले दो बार आंदोलन कारियों को शब्दजाल में उलझाकर आंदोलन तोड़ चुकी है। इस बार भी आंदोलन लगभग टूट गया था। मगर सोमवार को केसरिया साड़ियों में सिरपर धर्म का कलश और हाथों में गुरुदेव जंभोजी के संदेश के प्रतीक खेजड़ी के पौधों को लेकर जब विशाल जनसमुदाय बीकानेर की सड़कों पर आगे बढ़ा तो कलशयात्राओं के तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। फोटो: मनीष पारीक खेजड़ी बचाओ आंदोलन: मुख्यमंत्री से मिलकर लौटे संत, राजस्व सचिव की जगह संभागीय आयुक्त का पत्र मिला संभागीय आयुक्त की ओर से जिला कलेक्टर को लिखे गए पत्र को लेकर संत दिनभर असमंजस में रहे। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि यदि सरकार प्रतिबंध के आदेश जारी करती तो महापड़ाव स्थगित कर देते मगर सरकार ऐसा नहीं चाहती। मंच से जांबा के महंत आनंद प्रकाश महाराज, लालासर शास्त्री, स्वामी बलदेवा नंद महाराज आदि संतों ने जयपुर में हुई वार्ता का विवरण पेश किया। खेजड़ी बचाओ आंदोलन के तहत महापड़ाव पर बैठीं सैकड़ों महिलाओं ने सोमवार को कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा के दौरान बाजार में जाम लग गया। विशाल कलश यात्रा देखने के लिए दुकानदार भी सड़क पर आ गए।

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